- नगर निगम में संविधान हत्या दिवस पर प्रदर्शनी आयोजित, लोकतंत्र सेनानियों को किया गया सम्मानित
- वक्ताओं ने कहा- आपातकाल में संविधान की आत्मा और नागरिक अधिकारों पर किया गया था प्रहार
रूद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय आह्वान पर गुरुवार को नगर निगम सभागार में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और उस दौर की परिस्थितियों को प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया गया।

इस अवसर पर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में हरीश पंत,सुभाष छाबड़ा
श्री जुगल बाबा जी श्री सूरज गुलाटी जी श्री कृष्णा नंगी श्री ओम प्रकाश ठुकराल जी श्री सुरेश मुंशी जी श्री तिलक घई श्री कस्तूरी लाल तागरा नरेश रस्तोगी जी श्री राजकुमार हुडिया जी श्री दयाराम जी
श्री गजेंद्र सिंह संधू श्रीमती राणा श्री राजेंद्र राणा जी श्री हरीश चौधरी सुनील राणा श्रवीर अरोड़ा श्री राजेंद्र बजरंगी श्री सतीश अरोड़ा श्री मुख राज गुलाटी
श्री राम गोपाल गुप्ता श्री श्याम आनंद श्री वेद ठुकराल श्री चिंतन श्री मामा, श्री राणा,श्री संदीप, श्री सुखदेव पटवा, श्री गुरु दत्त,श्री रवि तुलसी श्री हरि जालोतरा, श्री सुभाष खंडेलवाल,श्री मिगलानी, श्री मती शैली गुप्ता सहित अन्य सेनानी व उनके परिजन शामिल थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद अजय भट्ट ने किया। इस दौरान भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को नमन किया।
इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। आपातकाल केवल राजनीतिक विरोधियों को दबाने का प्रयास नहीं था बल्कि यह संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लागू कर देश के संविधान की आत्मा को चोट पहुंचाई थी। नागरिकों के मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया गया और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को जेलों में डाल दिया गया।
सांसद भट्ट ने कहा कि आपातकाल के दौरान लाखों निर्दाेष लोगों को गिरफ्तार किया गया। विपक्षी नेताओं, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों को यातनाएं सहनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि वह दौर देश में भय का वातावरण बनाने वाला था, लेकिन लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों ने संघर्ष जारी रखा और अंततः लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह जान सकें कि जब संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास हुआ तो देश किन परिस्थितियों से गुजरा।
कार्यक्रम संयोजक महापौर ने कहा कि आपातकाल सत्ता के अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संविधान सर्वाेपरि है और नागरिक अधिकारों की रक्षा हर सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों तक को जेलों में बंद किया गया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया गया और लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास हुआ।
महापौर ने कहा कि मीडिया पर सेंसरशिप लागू करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला था। समाचार प्रकाशित करने से पहले सरकारी अनुमति जैसी व्यवस्था यह बताती है कि उस समय हालात कितने गंभीर थे। उन्होंने कहा कि संविधान हत्या दिवस सिर्फ इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है बल्कि भविष्य में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सजग रहने का संदेश भी देता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल ने कहा कि आपातकाल के कठिन दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनसंघ सहित अनेक संगठनों और लोकतंत्र समर्थकों ने बड़ा संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि हजारों कार्यकर्ताओं ने जेलों में यातनाएं सहन कीं लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से पीछे नहीं हटे। आपातकाल का समय नागरिक अधिकारों और मानवीय स्वतंत्रता के हनन का दौर था। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए कितने लोगों ने संघर्ष किया। वर्ष 1977 में जनता ने अपने मताधिकार के माध्यम से लोकतंत्र की पुनर्स्थापना कर यह साबित किया कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वाेपरि है।
विधायक शिव अरोरा ने कहा कि आपातकाल भारतीय संविधान पर लगा ऐसा कलंक था जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई। उन्होंने कहा कि संविधान ने प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता और अधिकार प्रदान किए हैं, लेकिन आपातकाल के दौरान इन्हीं अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है।
कार्यक्रम में दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता, जिला महामंत्री तरूण दत्ता, वेद ठुकराल, सुनील ठुकराल, पारस चुघ, विजय तोमर, धीरेन्द्र मिश्रा, हिमांशु शुक्ला, अक्षय अरोड़ा, मुकेश पाल विवेक दीप सिंह , सुनील सिंह, हिमांशु शुक्ला,रोशन अरोरा, योगेश वर्मा, धर्म सिंह कोहली,सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
