विशेष डेस्क | नवभारत मीडिया
उत्तराखंड के चमोली जिले की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित रूपकुंड झील दुनिया की सबसे रहस्यमयी झीलों में गिनी जाती है। समुद्र तल से करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झील को “स्केलेटन लेक” यानी कंकालों वाली झील के नाम से भी जाना जाता है।
रूपकुंड पहली बार उस समय चर्चा में आई जब यहां बड़ी संख्या में मानव कंकाल पाए गए। बर्फ पिघलने पर झील के किनारों और तल में सैकड़ों मानव अवशेष दिखाई दिए, जिसने वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को हैरान कर दिया।
शुरुआत में माना गया कि ये किसी सेना के सैनिकों के अवशेष हो सकते हैं, लेकिन बाद में हुए शोध में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वैज्ञानिकों के अनुसार इन कंकालों में अलग-अलग समय और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के अवशेष शामिल हैं।
कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिले कि कई लोगों की मौत अचानक हुई थी। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि अत्यधिक बड़े ओलों की बारिश जैसी प्राकृतिक आपदा इसके पीछे एक कारण हो सकती है। हालांकि सभी कंकालों के बारे में आज भी पूरी तरह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रूपकुंड झील आज ट्रेकर्स, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस रहस्यमयी झील को देखने पहुंचते हैं।
उत्तराखंड की बर्फीली चोटियों के बीच छिपा यह रहस्य आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। विज्ञान ने कई सवालों के जवाब खोज लिए हैं, लेकिन रूपकुंड झील अब भी अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है।
