- कड़े नियमों के पीछे छिपे हैं ये खौफनाक रहस्य
शुभम कुमार
अपनी समृद्ध धार्मिक संस्कृति और अनूठी मान्यताओं के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में रहस्यों की कोई कमी नहीं है। इसी कड़ी में ‘NBM Facts’ आज आपको बताने जा रहा है जिला मुख्यालय से लगभग 160 किलोमीटर दूर, सीमांत विकास खंड मोरी में यमुना की सहायक टौंस नदी के किनारे बसे ‘नैटवाड़ गांव’ के एक ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में, जिसके नियम सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह दरबार है इस क्षेत्र के राजा कहे जाने वाले— ‘पोखू देवता’ का।
अशिष्टता मानी जाती है दर्शन करना, जानिए मूर्ति की बनावट:
आमतौर पर हर मंदिर में भगवान के स्वरूप के दर्शन किए जाते हैं, लेकिन पोखू देवता के मंदिर में पुजारी से लेकर आम श्रद्धालुओं तक के लिए मूर्ति को देखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके पीछे एक बेहद हैरान करने वाली वजह है। लोक मान्यताओं के अनुसार, पोखू देवता का मुंह पाताल की ओर है और उनकी कमर से ऊपर का भाग (पेट आदि) धरती पर है। वे यहाँ उल्टे और नग्नावस्था में अवस्थित हैं। इसी कारण इस अवस्था में उन्हें देखना घोर अशिष्टता और वर्जित माना गया है। यही वजह है कि यहाँ पूजा से लेकर मन्नत मांगने तक, सब कुछ मूर्ति की तरफ पीठ करके ही किया जाता है।
बलि की वेदी और सूख चुके खून के छींटे पैदा करते हैं खौफ:
नैटवाड़ स्थित इस प्राचीन मंदिर की बनावट भी मन में एक अनजाना सा भय और कौतूहल पैदा करती है। मंदिर के पहले कक्ष में प्रवेश करते ही एक बलि की वेदी दिखाई देती है, जिस पर खून के सूख चुके प्राचीन छींटे आज भी मौजूद हैं। इसके ठीक बाद वाले अंदरूनी कक्ष में पवित्र शिवलिंग स्थापित है, और उसके ठीक पीछे पोखू देवता का मुख्य कक्ष है। मुख्य कक्ष में देवता का सिर या चेहरा किसी को दिखाई नहीं देता, जिससे पूरा माहौल एक रहस्यमयी और अलौकिक शक्ति के प्रभाव का अहसास कराता है।
भगवान शिव के सेवक और कर्ण के प्रतिनिधि:
प्राचीन वेद-पुराणों और स्थानीय गाथाओं में पोखू महाराज को अंगराज कर्ण का प्रतिनिधि और भगवान शिव का परम सेवक माना गया है। उनका स्वरूप बेहद डरावना और अपने अनुयायियों व नियमों के प्रति बेहद कठोर स्वभाव रखने वाला है। उनके इसी कड़े अनुशासन का खौफ है कि इस पूरे क्षेत्र में कभी कोई चोरी, डकैती या अन्य कोई सामाजिक अपराध नहीं होता।
जहाँ कानून थक जाए, वहाँ तुरंत मिलता है न्याय:
पोखू देवता को इस पूरे जौनसार-बावर और रंवाई घाटी क्षेत्र में ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजा जाता है। ऐसी अटूट मान्यता है कि जिस पीड़ित व्यक्ति को दुनिया के किसी कोने या अदालत से न्याय नहीं मिलता, उसे पोखू देवता के इस अलौकिक ‘कोर्ट’ में कदम रखते ही तुरंत और सटीक न्याय मिलता है। इसी कारण लोग दूर-दूर से अपनी फरियाद लेकर यहाँ उल्टे मुंह खड़े होकर गुहार लगाते हैं। यहाँ तक कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव में दरातियों और चाकुओं के रूप में भी इन्हीं पोखू देवता की प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।
नवंबर का मेला और आधी रात की सटीक भविष्यवाणी:
क्षेत्र में आने वाली किसी भी दैवीय आपदा या संकट के काल में पोखू देवता हमेशा ग्रामीणों की रक्षा करते हैं। हर साल नवंबर के महीने में यहाँ एक भव्य और ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले की सबसे खास बात यह है कि रात के सन्नाटे में मंदिर के मुख्य पुजारी पूरे क्षेत्र और गाँव के भविष्य को लेकर कुछ भविष्यवाणियां करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, आगामी साल में गाँव की खुशहाली, मौसम का मिजाज और फसलों के उत्पादन को लेकर पुजारी के मुंह से निकली एक-एक बात पत्थर की लकीर साबित होती है।
निष्कर्ष: अपनी इन्हीं रोंगटे खड़े कर देने वाली विशेषताओं, कठिन नियमों और अलौकिक आस्था के कारण पोखू महाराज का यह मंदिर आज एक बड़े तीर्थ के रूप में विख्यात है, जो यहाँ आने वाले शोधकर्ताओं और पर्यटकों को भी अपनी ओर गहराई से आकर्षित करता है।
