- लैंसेट की नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, बदलती जीवनशैली और देर से पहचान बन रही सबसे बड़ी समस्या
सेहत की बात | NBM Health
हमारे शरीर में किडनी एक ऐसी मशीन की तरह काम करती है, जो बिना रुके दिन-रात शरीर को स्वस्थ रखने में जुटी रहती है। खून से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालना, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां किडनी निभाती है। लेकिन चिंता की बात यह है कि किडनी से जुड़ी बीमारी अक्सर धीरे-धीरे और बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के आगे बढ़ती है। कई बार मरीज को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उसकी किडनी की कार्यक्षमता कम हो रही है। इसी कारण क्रॉनिक किडनी डिजीज को स्वास्थ्य विशेषज्ञ “साइलेंट बीमारी” भी कहते हैं।
दुनियाभर के लिए बड़ी चुनौती बन रही किडनी बीमारी
हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट ने किडनी रोगों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार क्रॉनिक किडनी डिजीज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल होती जा रही है। अनुमान जताया गया है कि आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और बढ़ सकता है और वर्ष 2040 तक यह वैश्विक स्तर पर मौत के प्रमुख कारणों में पांचवें स्थान तक पहुंच सकती है।
बदलती जीवनशैली बढ़ा रही खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खानपान की गलत आदतें और कई बीमारियां किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग के सबसे बड़े कारणों में माने जाते हैं। इसके अलावा मोटापा, दिल से जुड़ी बीमारियां, उम्र बढ़ना और अनियमित जीवनशैली भी किडनी की सेहत को प्रभावित कर सकती है।
समय पर पहचान से बच सकती है किडनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी रोग से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय पर जांच की होती है। यदि बीमारी शुरुआती दौर में पकड़ में आ जाए तो उसके प्रभाव को कम करने और किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। आज eGFR टेस्ट, यूरिन जांच, आधुनिक इमेजिंग और नई तकनीकों की मदद से डॉक्टर किडनी की स्थिति को पहले से बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं।
पुरुषों और महिलाओं में अलग हो सकता है असर
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि किडनी रोग का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। पुरुषों और महिलाओं में बीमारी बढ़ने की गति और इलाज के प्रति प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। इसी कारण आने वाले समय में मरीज की स्थिति और जरूरत के हिसाब से इलाज पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
नई दवाओं से जगी उम्मीद
जहां किडनी रोगों के बढ़ते मामले चिंता बढ़ा रहे हैं, वहीं मेडिकल क्षेत्र में हो रही नई रिसर्च उम्मीद भी जगा रही है। नई दवाओं और आधुनिक उपचारों से किडनी रोग की गति को धीमा करने में मदद मिलने की संभावना बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी के साथ-साथ डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याओं पर भी एक साथ ध्यान देना जरूरी है।
शरीर के संकेतों को समझना जरूरी
किडनी की समस्या होने पर शरीर कई बार छोटे-छोटे संकेत देता है। हाथ-पैर या आंखों के आसपास सूजन, पेशाब में बदलाव, लगातार थकान, भूख कम लगना या कमजोरी जैसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
स्वस्थ खानपान, नियमित दिनचर्या, ब्लड प्रेशर और शुगर पर नियंत्रण तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच किडनी को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
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Disclaimer: यह जानकारी स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से रिसर्च रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
