- आवास और प्रवास मार्गों में बढ़ते व्यवधान से संकट में एशियाई हाथी; संरक्षण के लिए इको-फ्रेंडली कॉरिडोर और आधुनिक तकनीक पर जोर
हर वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण, उनके सामने मौजूद चुनौतियों और मानव-हाथी संघर्ष को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2012 से मनाया जा रहा यह दिवस हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके सुरक्षित विचरण मार्गों को बचाने का संदेश देता है।

जंगल में रहने वाले शाकाहारी जीवों में हाथी सबसे बड़े जीव हैं। एशियाई हाथी झुंड में रहते हैं, जिसका नेतृत्व सामान्यतः सबसे उम्रदराज मादा यानी कुलमाता करती है। वहीं नर हाथी अक्सर एकाकी जीवन बिताते हैं और प्रजनन के दौरान झुंड के आसपास दिखाई देते हैं। हाथियों की स्मरण शक्ति और संज्ञानात्मक क्षमता भी उल्लेखनीय मानी जाती है। वे औजारों का इस्तेमाल करने की क्षमता भी रखते हैं।
एक वयस्क नर एशियाई हाथी करीब 9 फीट तक ऊंचा, 21 फीट तक लंबा और लगभग 4 टन तक वजनी हो सकता है, जबकि मादाएं अपेक्षाकृत छोटी होती हैं। हाथियों को नदी, तालाब और जलस्रोतों के आसपास तथा घास के मैदानों और घने जंगलों में रहना पसंद है। उत्तर भारत में राजाजी नेशनल पार्क और कॉर्बेट नेशनल पार्क हाथियों के महत्वपूर्ण आवासों में शामिल हैं।
हाथियों का मानव जीवन से भी पुराना संबंध रहा है। प्राचीन भारत में इनका इस्तेमाल युद्ध और भारी वजन उठाने जैसे कार्यों में किया जाता था। आज जंगली हाथियों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं, जिससे वन्यजीव पर्यटन के माध्यम से राज्यों को आर्थिक लाभ भी मिलता है।
हाथी के बच्चे के जन्म के कुछ ही घंटों बाद अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता विकसित हो जाती है। मां अपने बच्चे की लगातार निगरानी करती है और खतरा महसूस होने पर उसकी सुरक्षा के लिए बेहद आक्रामक हो सकती है। हाथियों का यह पारिवारिक व्यवहार उनके सामाजिक जीवन की मजबूत संरचना को दर्शाता है।
हालांकि, आज इस विशाल और महत्वपूर्ण वन्यजीव के अस्तित्व पर कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। वनों की कटाई से आवास का नुकसान, कृषि विस्तार, संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण, प्रवास मार्गों में बाधा, अवैध शिकार, बढ़ती मानव आबादी और बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाएं हाथियों के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।
हाथी गलियारे संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार
हाथी गलियारे वे प्राकृतिक रास्ते हैं, जो हाथियों के अलग-अलग जंगलों और आवासों को आपस में जोड़ते हैं। एक वयस्क हाथी को प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भोजन और पानी की आवश्यकता होती है। भोजन और पानी की तलाश में हाथी पीढ़ियों से निर्धारित मार्गों का इस्तेमाल करते रहे हैं।
हाईवे, रेलवे लाइन, कृषि विस्तार और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इन प्राकृतिक गलियारों के टूटने से हाथियों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। इसके चलते हाथियों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने वाली आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ इको-फ्रेंडली ओवरपास और अंडरपास जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि हाथियों के पारंपरिक मार्ग सुरक्षित रह सकें।
संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी
विश्व हाथी दिवस केवल हाथियों के प्रति जागरूकता का दिन नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश भी देता है। हाथियों का संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है, जब सरकार, वन विभाग, स्थानीय समुदाय और आम लोग मिलकर उनके आवास और गलियारों की रक्षा करें।
हाथियों के संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में भी अगस्त को एशियाई हाथी जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। विशेषज्ञों और वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि सुरक्षित पर्यावरण-अनुकूल गलियारे हाथियों के साथ-साथ मानव आबादी की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी हैं।
— ई. रुपेश कुमार अरोरा, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, रुद्रपुर

