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  • जानें क्यों हर साल 25 मई से ही शुरू होती है सबसे भीषण गर्मी

विशेष रिपोर्ट: शुभम कुमार

रुद्रपुर: उत्तर और मध्य भारत इस समय भीषण लू (Heatwave) की चपेट में है, लेकिन असली परीक्षा कल यानी 25 मई से शुरू होने जा रही है। ज्योतिष और मौसम विज्ञान दोनों के लिहाज से साल के सबसे गर्म 9 दिन, जिन्हें ‘नौतपा’ कहा जाता है, कल से शुरू हो रहे हैं। 25 मई से 2 जून तक चलने वाले इस दौर में सूर्य देव अपने सबसे रौद्र रूप में होंगे।लेकिन क्या आप जानते हैं कि नौतपा हर साल अमूमन 25 मई से ही क्यों शुरू होता है? इसके पीछे का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय गणित क्या है? आइए समझते हैं इस एक्सक्लुसिव रिपोर्ट में।

क्या होता है ‘नौतपा’?

सरल शब्दों में कहें तो सनातन पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि के शुरुआती 9 दिनों को ‘नौतपा’ कहा जाता है। खगोलीय दृष्टि से इस समय पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य के सबसे नजदीक होता है, जिससे सूर्य की किरणें भारत के ऊपर बिल्कुल सीधी पड़ती हैं। ज्योतिष में रोहिणी को शीतलता का प्रतीक माना गया है, और जब उग्र सूर्य इसमें प्रवेश करते हैं, तो वे इसकी शीतलता को सोख लेते हैं, जिससे धरती का तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है।

25 मई की ‘डेडलाइन’ का गणित

यह कोई संयोग नहीं है कि हर साल नौतपा 25 मई (या कभी-कभी 24 मई की रात) से ही शुरू होता है। इसके पीछे ग्रहों की चाल का एक सटीक गणित काम करता है। पृथ्वी सूर्य का चक्कर 365 दिन और लगभग 6 घंटे में लगाती है, जिससे सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन हर साल एक निश्चित समय पर ही होता है। सूर्य हर साल 14 या 15 मई को वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, और इसके ठीक 10 से 11 दिन बाद यानी 25 मई को वे रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण में कदम रखते हैं। चूंकि सूर्य की यह चाल हमारे अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर के सौर चक्र से पूरी तरह मेल खाती है, इसलिए यह तारीख हर साल फिक्स रहती है।

मौसम विज्ञान बनाम ज्योतिष

दिलचस्प बात यह है कि नौतपा को लेकर ज्योतिष और विज्ञान दोनों एक ही मोड़ पर आकर मिलते हैं। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि नौतपा के इन 9 दिनों में जितनी ज्यादा गर्मी होगी, मानसून उतना ही अच्छा होगा। वहीं, मौसम विज्ञान का तर्क है कि मई के अंत में पड़ने वाली भीषण गर्मी से मैदानी इलाकों में एक मजबूत ‘लो-प्रेशर जोन’ (कम दबाव का क्षेत्र) बनता है। यह क्षेत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं को तेजी से भारत की ओर खींचता है। यानी विज्ञान भी मानता है कि नौतपा का तपना, देश में अच्छे मानसून की गारंटी है।

इस बार क्या हैं संकेत और सावधानियां?

मौसम विश्लेषकों के अनुसार, इस साल प्रशांत महासागर में अल-नीनो के कमजोर होने और ला-नीना के सक्रिय होने के संकेत हैं, जिससे मानसून तो बेहतर रहेगा, लेकिन नौतपा के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, राजस्थान, यूपी, मप्र, हरियाणा) में पारा 45°C से 48°C के पार जा सकता है। इस भीषण तपन से बचने के लिए दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचना बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी न होने दें और नींबू पानी, छाछ या ओआरएस का घोल नियमित अंतराल पर लेते रहें।निष्कर्ष:कल से शुरू हो रहा नौतपा भले ही हमें भीषण गर्मी से तड़पाएगा, लेकिन यह तपिश आने वाले सुनहरे मानसून की नींव है। इसलिए खुद को सुरक्षित रखें और मौसम के इस सबसे गर्म चक्र का सामना समझदारी से करें।

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