ईरान-अमेरिका युद्ध: 48 घंटे की मोहलत और 45 दिनों के सीजफायर की ‘अंतिम’ कोशिश; पाकिस्तान समेत 3 देश बने मध्यस्थ, क्या टलेगी तबाही?
वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी महायुद्ध को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की मध्यस्थता में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 45 दिनों के संभावित संघर्षविराम (Ceasefire) की शर्तों पर बैकचैनल बातचीत चल रही है। यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कल (मंगलवार, 7 अप्रैल 2026) शाम तक की अंतिम मोहलत दी है।
दो चरणों वाला ‘शांति समझौता’ और होर्मुज का पेंच
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के दो मुख्य चरण हैं:
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पहला चरण: 45 दिनों का अस्थायी संघर्षविराम, ताकि शांति वार्ता के लिए सुरक्षित माहौल मिल सके।
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दूसरा चरण: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलना और ईरान के यूरेनियम भंडार को देश से बाहर ले जाना या कम करना।
हालांकि, ईरान इन शर्तों पर आसानी से झुकता नहीं दिख रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे केवल 45 दिनों की मोहलत के बदले अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत (होर्मुज और यूरेनियम) को दांव पर नहीं लगाएंगे।
ट्रंप की ‘नरक’ वाली चेतावनी: “मंगलवार होगा पावर प्लांट और पुल डे”
ईस्टर के मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्वभाव के अनुरूप बेहद सख्त लहजे में ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा— “होर्मुज स्ट्रेट खोलो, वरना तुम नरक में रहोगे। मंगलवार को ईरान में ‘पावर प्लांट दिवस’ और ‘पुल दिवस’ एक साथ मनाया जाएगा।” ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि कल शाम तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे को मिट्टी में मिला देगा और उसके तेल पर कब्जा कर लेगा।
ईरान का पलटवार: “अब पहले जैसा कुछ नहीं होगा”
ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उनकी नौसेना इकाई ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब अमेरिका और इजरायल के लिए पहले जैसी कभी नहीं होगी। ईरान का मानना है कि अमेरिका और इजरायल केवल कागजों पर समझौता कर फिर से हमला कर सकते हैं, इसलिए वे ठोस गारंटी चाहते हैं।
