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  • राहुल गांधी के कथित पीए ने महिला नेत्री भावना पाण्डे से ठगे 25 लाख
  • दिग्गज नेताओं की आवाजें सुनाकर बुना गया ठगी का मायाजाल
  • टिकट के नाम पर हुई ठगी की जांच में जुटी पुलिस

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में टिकट और पद की चाहत किस कदर जोखिम भरी हो सकती है, इसका एक सनसनीखेज उदाहरण राजधानी देहरादून में सामने आया है। खुद को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का पीए कनिष्क बताने वाले एक शातिर ठग ने सक्रिय महिला नेता भावना पांडे को अपना शिकार बनाते हुए करीब 25 लाख रुपये की चपत लगा दी । राजपुर थाने में दर्ज शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

इस ठगी की पटकथा बेहद शातिराना ढंग से लिखी गई थी। पीड़िता भावना पांडे के अनुसार, आरोपी ने उनका विश्वास जीतने के लिए फोन पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की आवाजें सुनाईं। इन आवाजों के जाल में फंसकर पीड़िता को यह यकीन हो गया कि वह वास्तव में आलाकमान के सीधे संपर्क में हैं और उनकी राजनीतिक राह अब आसान होने वाली है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठग ने उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिलाने और दिल्ली के कद्दावर नेताओं से मुलाकात कराने का झांसा दिया। ठग ने खुद को कांग्रेस की केंद्रीय मशीनरी का हिस्सा बताकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं कि पीड़िता को उसकी हर बात सच लगने लगी।

साजिश को आगे बढ़ाते हुए आरोपी ने पीड़िता को बताया कि विधायकों की एक विशेष टीम देहरादून के एक वीआईपी होटल में रुकी हुई है, जो राज्य की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का सर्वे कर रही है। सर्वे के खर्च और चुनाव की तैयारियों के नाम पर आरोपी ने किश्तों में मोटी रकम की मांग शुरू कर दी। झांसे में आकर पीड़िता ने 13 अप्रैल 2026 को अपने बैंक खाते से लगभग साढ़े नौ लाख रुपये ट्रांसफर किए और इसके बाद करीब पांच लाख रुपये नकद भी दिए। ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, महाराष्ट्र के एक कथित विधायक और अन्य सहयोगियों के नाम पर भी अलग-अलग किश्तों में पैसे लिए गए, जिससे कुल ठगी की रकम 25 लाख रुपये तक पहुंच गई।

इस मामले का एक अन्य गंभीर पहलू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की छवि से भी जुड़ा है। चर्चा है कि क्या यह केवल धन की उगाही का मामला है या इसके पीछे संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बदनाम करने की कोई गहरी साजिश या ‘सुपारी’ शामिल है। पीड़िता ने अंदेशा जताया है कि यह एक संगठित गिरोह है जो कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भावनाओं और टिकट की दावेदारी का फायदा उठा रहा है। काफी समय बीत जाने और वादा पूरा न होने पर जब भावना पांडे ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने पहले टालमटोल की और बाद में पूरी तरह संपर्क काट दिया। फिलहाल, देहरादून पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि फोन पर सुनाई गई आवाजें ‘वॉयस क्लोनिंग’ थी या इसके पीछे कोई और बड़ा सियासी खेल चल रहा है।

कौन हैं भावना पांडे ?

उत्तराखंड की राजनीति में भावना पांडे एक ऐसा नाम हैं जिनकी पहचान किसी एक दल या एक भूमिका तक सीमित नहीं रही है। मूल रूप से अल्मोड़ा जिले की रहने वाली भावना पांडे ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान की थी, जिसके लिए उन्हें राज्य आंदोलनकारी का दर्जा भी प्राप्त है। उनका व्यक्तित्व सामाजिक सरोकारों से लेकर तीखी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच झूलता रहा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक अपनी पहचान बनाने वाली भावना पांडे समय-समय पर गरीबों की सहायता और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी के लिए चर्चाओं में बनी रहती हैं।

उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा और रणनीतिक बदलावों का गवाह रहा है। राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की कोशिश में उन्होंने जनता कैबिनेट पार्टी नाम से एक नया दल भी गठित किया था, जिसके माध्यम से उन्होंने राज्य की व्यवस्थाओं को चुनौती देने का प्रयास किया। हालांकि, उनके करियर का सबसे दिलचस्प मोड़ हालिया लोकसभा चुनावों के दौरान देखने को मिला, जब उन्होंने हरिद्वार जैसी महत्वपूर्ण सीट पर बेहद कम समय में बड़े राजनीतिक यू-टर्न लिए। पहले उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया, लेकिन राजनीतिक समीकरणों के बीच कुछ ही दिनों में उन्होंने बसपा का साथ छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर सबको हैरान कर दिया।

सत्ता और संगठन के गलियारों में गहरी पैठ के कारण उन्हें अक्सर पावर ब्रोकर जैसे शब्दों से भी संबोधित किया जाता रहा है। उनके साथ हुई 25 लाख रुपये की ठगी का मामला भी इसी प्रभाव और सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। ठग ने उनकी इसी राजनैतिक पृष्ठभूमि और कांग्रेस के दिग्गजों से उनके पुराने परिचय का लाभ उठाकर उन्हें झांसे में लिया।

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