IMG_20261010_070044
  • पंतनगर में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास पर जोर; एसएसपी अजय गणपति सहित पुलिस अधिकारियों व विशेषज्ञों ने किया प्रतिभाग

पंतनगर। मानव तस्करी जैसे गंभीर एवं संगठित अपराध की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास के साथ दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पुलिस की ओर से पंतनगर स्थित गांधी हॉल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया गया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखंड सहित छह राज्यों के पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सरकारी विभागों, अभियोजन अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों एवं बाल कल्याण समितियों के कुल 134 प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

सम्मेलन में अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरुगेशन, पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर अजय गणपति सहित विभिन्न जनपदों के पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

मानव तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई पर जोर

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संगठित अपराध है। इसकी रोकथाम के लिए पुलिस के साथ सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया।

सम्मेलन में उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने मानव तस्करी से जुड़े मामलों में अपने अनुभव और चुनौतियां साझा कीं। इस दौरान अपराधियों के अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान, उनके नए तौर-तरीकों का पता लगाने और उनके खिलाफ समन्वित कार्रवाई को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

सम्मेलन में मानव तस्करी से जुड़े मामलों की आधुनिक तकनीकों से जांच, साक्ष्य आधारित विवेचना, प्रभावी अभियोजन तथा पीड़ितों की समयबद्ध पहचान जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा पीड़ितों को बचाव के बाद कानूनी एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली की पहचान कर उसे समाप्त करने के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान जरूरी है।

पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास को प्राथमिकता

सम्मेलन में बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की सुरक्षित बरामदगी, संरक्षण तथा पुनर्वास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। पीड़ितों की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने, उन्हें आवश्यक कानूनी एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार बाल कल्याण समिति और सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

इस दौरान हरिद्वार जनपद पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की केस स्टडी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद कर पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया। इन मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

सम्मेलन के दौरान मानव तस्करी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई, पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष मंथन किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

पंतनगर में आयोजित यह सम्मेलन मानव तस्करी के विरुद्ध विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा पीड़ितों को त्वरित न्याय एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।

error: Content is protected !!