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  • संस्कृति से खिलवाड़ करने वाले सीधे जाएंगे सलाखों के पीछे
  • नानकमत्ता में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह में गरजे मुख्यमंत्री
  • मेधावियों को किया सम्मानित; थारू समाज के विकास के लिए खोला सौगातों का पिटारा

नानकमत्ता (नवभारत मीडिया ब्यूरो)।

नानकमत्ता साहिब की पवित्र धरती पर आज शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार, 16 मई 2026 को यहाँ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर भव्य शुभारंभ किया। नानकमत्ता पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्थानीय जनता और थारू समाज द्वारा पुष्प एवं फूलमालाओं से ऐतिहासिक और जोरदार स्वागत किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह से ठीक पहले मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक नानकमत्ता गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए प्रार्थना भी की।

महाराणा प्रताप और थारू समाज की गौरवशाली विरासत को नमन

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को कोटि-कोटि नमन किया और कार्यक्रम में उमड़े थारू समाज के सभी परिवारजनों का आत्मीय अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि गुरुओं के आशीर्वाद से सिंचित इस पवित्र भूमि पर भारत मां के महान सपूत, अदम्य साहस और अद्वितीय स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप का स्मरण करना बेहद सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री ने इस शानदार आयोजन के लिए राणा परिवार और नानकमत्ता के सभी समाजसेवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ के राजा नहीं थे, बल्कि वे संपूर्ण भारत की आन, बान और स्वाभिमान के अमर प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग, संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति की एक ऐसी प्रेरणादायी गाथा है, जो सदियों बाद भी हर भारतीय के भीतर असीम ऊर्जा और गर्व का संचार करती है। मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने जंगलों में भटकना और घास की रोटी खाना तो स्वीकार किया, लेकिन मुगलों के आगे कभी घुटने नहीं टेके। महाराणा प्रताप का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने थारू समाज की सराहना करते हुए कहा कि उनके रीति-रिवाज, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और प्रकृति से उनका गहरा जुड़ाव हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इस आधुनिक युग में भी थारू समाज ने जिस मजबूती से अपनी जड़ों को संजोकर रखा है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मोदी जी के नेतृत्व में जनजातीय समाज का सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश के जनजातीय समाज के सम्मान, स्वाभिमान और समग्र विकास के लिए अनेक ऐतिहासिक पहलें शुरू की गई हैं। केंद्र सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सुशासन वही है, जिसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ पहली बार देश में जनजातीय समुदायों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना, और प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी क्रांतिकारी योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं।

उन्होंने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2014 के बाद देश में जनजातीय समाज को वह वास्तविक सम्मान मिला है जिसके वे हकदार थे। आज देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) पर आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी का आसीन होना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए जनजातीय समाज कोई ष्वोट बैंकष् नहीं, बल्कि ष्देश का गौरवष् है। प्रधानमंत्री ने ही पहली बार भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को श्जनजातीय गौरव दिवसश् के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर इस समाज का मान पूरे विश्व में बढ़ाया है।

उत्तराखंड सरकार का श्विकल्प रहित संकल्प: थारू समाज को करोड़ों की सौगातें

राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी डबल इंजन सरकार केवल कागजों पर योजनाएं नहीं बनाती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर वास्तविक बदलाव लाती है। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए सरकार ने अटल आवास योजना की आय सीमा को व्यावहारिक बनाते हुए घर बनाने की लागत को बढ़ाया है, जिसके तहत अकेले ऊधमसिंह नगर जनपद में 3 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस वर्ष आए आवेदनों में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी जनजातीय समाज की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत जनपद में सैकड़ों घरों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार करोड़ों रुपये की धनराशि खर्च कर रही है। जनजाति कल्याण विभाग के माध्यम से आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों का कायाकल्प किया जा रहा है। इन आश्रम पद्धति विद्यालयों को कक्षा 12 तक अपग्रेड किया जा रहा है। बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए खटीमा में बालिका छात्रावास हेतु 4 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि बाजपुर में 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्कूल व छात्रावास का निर्माण जारी है। गदरपुर में 100 बेड का बालक छात्रावास आकार ले रहा है, और थारू राजकीय इंटर कॉलेज में 2 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खेल मैदान के सौंदर्गीकरण, ऑडिटोरियम के आधुनिकीकरण और भवन मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।

माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आजीविका मिशन और वन धन केंद्रों के माध्यम से स्वरोजगार को रफ्तार दी जा रही है। महिला समूहों को 1 करोड़ रुपये से अधिक की चक्रीय निधि और 8 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, सितारगंज विधानसभा में भव्य थारू विकास भवन का निर्माण किया जा रहा है और जनजातीय क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए सरकार 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है, जिसका सबसे ज्यादा लाभ ऊधमसिंह नगर के परिवारों को मिला है। जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा प्रशासनिक फैसला साझा करते हुए बताया कि ऊधमसिंह नगर, देहरादून, पिथौरागढ़ और चमोली में जनजातीय विकास को गति देने के लिए अलग से जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही, जनजातीय युवाओं को यूपीएससी, पीसीएस, आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए देहरादून में अत्याधुनिक ष्आदि लक्ष्य संस्थानष् की स्थापना की जा रही है। सरकार का विजन बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रत्येक जनजातीय परिवार की आँखों में आत्मसम्मान की चमक हो और युवाओं के पास रोजगार के भरपूर अवसर हों।

देवभूमि में नहीं चलेगा अधर्म का खेल, लैंड, लव और थूक जिहाद पर आर-पार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से तराई क्षेत्र में पनप रही कुछ देशविरोधी और समाजविरोधी ताकतों को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा और महाराणा प्रताप का जीवन हमें सिखाता है कि धर्मांतरण जैसी चुनौतियों के विरुद्ध अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा कैसे की जाती है। उन्होंने अत्यंत गंभीर लहजे में कहा कि पिछले कुछ समय से यह इनपुट मिल रहे हैं कि तराई के इस शांत क्षेत्र में धर्मांतरण का गंदा खेल खेलने की कोशिश की जा रही है। कुछ ताकतें हमारी भोली-भाली जनता और थारू समाज की मासूमियत का नाजायज फायदा उठाने का प्रयास कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कड़क आवाज में ललकारते हुए कहा कि मैं इस मंच से उन सभी अधर्मियों को साफ चेतावनी देना चाहता हूं कि कान खोलकर सुन लें, यह हमारी पवित्र ‘देवभूमि’ है। यहाँ अधर्म, छल और कपट का खेल कतई नहीं चलेगा। अगर किसी ने हमारी संस्कृति और आस्था के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस किया, तो उसके परिणाम बहुत घातक होंगे। इस प्रकार के अनैतिक कार्यों को जड़ से मिटाने के लिए हमारी सरकार ने देश का सबसे कठोर श्धर्मांतरण विरोधी कानूनश् बनाया है।

मुख्यमंत्री ने सीधे शब्दों में ऐलान किया कि देवभूमि उत्तराखंड में लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी दूषित व मुल्लावादी मानसिकताओं के लिए रत्ती भर भी स्थान नहीं है। प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट व सख्त निर्देश दे दिए गए हैं कि नानकमत्ता हो या प्रदेश का कोई भी कोना, जहाँ भी धर्मांतरण या इस तरह की अनैतिक गतिविधियों की शिकायत मिले, वहाँ बिना किसी देरी के त्वरित और कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जनता को बहलाने-फुसलाने वाले तत्वों के लिए देवभूमि में कोई जगह नहीं है, उनकी सही जगह सिर्फ और सिर्फ जेल की सलाखों के पीछे है। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे ऐसे तत्वों से सावधान रहें और कोई भी समस्या होने पर सरकारी अधिकारियों, भाजपा या राष्ट्रवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं से तुरंत संपर्क करें।

नानकमत्ता को पूर्ण तहसील और नगर पालिका बनाने की उठी मांग

कार्यक्रम के संयोजक और पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री, तमाम विशिष्ट अतिथियों और विशाल जनसमुद्र का आभार व्यक्त किया। उन्होंने महाराणा प्रताप के जीवन को अनुकरणीय बताते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष क्षेत्र की जनता की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं। डॉ. राणा ने मुख्यमंत्री से पूर्व में की गई घोषणाओं के कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने नानकमत्ता उप-तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने तथा नानकमत्ता नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद के रूप में अपग्रेड करने का विशेष अनुरोध किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया।

कार्यक्रम में उमड़ा हुजूम

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में क्षेत्र के तमाम शीर्ष जनप्रतिनिधि और उच्च प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मंच पर रुद्रपुर के विधायक शिव अरोरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम सिंह टूरना, खटीमा के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, रवींद्र सिंह राणा, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, नंदन सिंह खड़ायत, जीवन सिंह राणा, भास्कर सम्भल, संगीता राणा, रविंद्र राणा, पुष्पेंद्र राणा, ओम नारायण, गोपाल दत्त जोशी, धर्म सिंह, राजपाल सिंह, बलदेव सिंह, रंजीत सिंह और दारा सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। प्रशासनिक अमले की ओर से जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, डीडीओ सुशील मोहन डोभाल, उप जिलाधिकारी तुषार सैनी, गौरव पांडे तथा हिमांशु काफ़लतिया सहित तमाम विभागों के अधिकारी मुस्तैद रहे।

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