सियासी सफर का नया शिखर: नीतीश कुमार ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा; राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय’ पारी का आगाज, चारों सदनों के सदस्य बनने का दुर्लभ गौरव
पटना/नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के शीर्ष नेता नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया है। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने दिग्गजों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकतंत्र के चारों प्रतिष्ठित सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—का प्रतिनिधित्व करने का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त किया है।
1985 से 2026: एक अजेय विधायी यात्रा
नीतीश कुमार का संसदीय सफर चार दशकों की निरंतरता का उदाहरण है:
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विधानसभा: 1985 में नालंदा की हरनौत सीट से विधायक बनकर संसदीय जीवन की शुरुआत की।
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लोकसभा: 1989 में पहली बार नौवीं लोकसभा के सदस्य बने और केंद्र में रेल मंत्री व कृषि मंत्री के रूप में पहचान बनाई।
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विधान परिषद: 2006 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहकर ‘सुशासन बाबू’ के रूप में राज्य की कमान संभाली।
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राज्यसभा: अब 2026 में उच्च सदन के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति के बड़े कैनवास पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
मुख्यमंत्री आवास पर रणनीति और भविष्य के संकेत
इस्तीफा देने से पहले सीएम आवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में ललन सिंह, संजय कुमार झा और विजय कुमार चौधरी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार का दिल्ली प्रस्थान केवल एक पद का परिवर्तन नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी सियासी बिसात का हिस्सा है। शराबबंदी, महिला आरक्षण (50%) और साइकिल योजना जैसे क्रांतिकारी मॉडल्स के प्रणेता अब राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित करने की तैयारी में हैं।
