- पंचायतों और पर्यटन को मिली नई ताकत
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक राज्य के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली है। सरकार ने इस बैठक में 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाते हुए राज्य की बुनियादी व्यवस्थाओं में बड़े सुधारों का खाका खींचा है। सबसे प्रमुख निर्णय पर्वतीय क्षेत्रों में ‘स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति 2026’ का प्रख्यापन रहा, जिसे उत्तराखंड के भौगोलिक हालातों को देखते हुए पलायन रोकने और कृषि को लाभदायक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
खेती और प्रशासन में आधुनिक बदलाव
राज्य सरकार ने चकबंदी की प्रक्रिया को अब पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और आपत्तियों का निस्तारण त्वरित गति से हो सके। इसके साथ ही राजस्व परिषद के कामकाज को हाईटेक बनाने के लिए समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा नियमावली में संशोधन किया गया है। अब इन पदों के लिए कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि 8000 की टाइपिंग स्पीड के साथ माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और विंडोज का विशेष ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए इसका नाम बदलकर अब ‘परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान’ कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और कर्मचारियों को राहत
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने दोहरे मोर्चे पर काम किया है। एक ओर जहाँ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए चयन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के हितों का भी ख्याल रखा गया है। अब संविदा पर संकाय सदस्यों की नियुक्ति के लिए फाइल विभागीय मंत्री या मुख्यमंत्री तक भेजने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और सचिव स्तर पर ही तीन साल की संविदा नियुक्तियां की जा सकेंगी। सबसे बड़ी राहत राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के उन 277 कर्मियों को मिली है जो 2009 से संविदा या दैनिक वेतन पर कार्य कर रहे थे, अब उन्हें ‘समान कार्य-समान वेतन’ का लाभ मिलेगा। साथ ही चिकित्सा शिक्षा निदेशालय और लैब टेक्नीशियन संवर्ग के ढांचे का पुनर्गठन कर नए पदों का सृजन किया गया है।
पर्यटन और ग्रामीण ढांचे को नई संजीवनी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कैबिनेट ने पंचायत भवनों के निर्माण बजट में भारी वृद्धि की है। अब पंचायत भवन विहीन ग्राम पंचायतों में भवन निर्माण के लिए 10 लाख के बजाय 20 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की जाएगी। पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे योजना का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें अब कमरों की संख्या छह से बढ़ाकर आठ कर दी गई है। यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में इस संशोधन के साथ ही नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी स्वतः (ऑटो-रिन्यूअल) मोड पर डाल दिया गया है, जिससे संचालकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
ऊर्जा, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में बड़े निर्णय
ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार ने लघु जल विद्युत परियोजना नीति 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन कर विकासकर्ताओं के लिए नियमों को सरल बनाया है। इसके अलावा ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में निदेशक पदों की नियुक्ति के लिए ‘बाहरी विशेषज्ञों’ का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता के लिए नई नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है, जिससे मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी होगी। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए चंपावत के लोहाघाट स्थित महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रधानाचार्य समेत 16 नए पदों को मंजूरी दी गई है, जबकि कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला में 15 नए पदों के सृजन का निर्णय लिया गया है।
न्याय और सुरक्षा
न्याय विभाग के कार्यों में गति लाने के लिए मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय के आदेशों के क्रम में रजिस्ट्रार न्यायालय और केस प्रबंधक जैसे महत्वपूर्ण पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त गृह विभाग के अंतर्गत विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के सशक्तिकरण से आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी।
लघु जल विद्युत नीति
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के प्रावधानों को उदार बनाया है। अब परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक स्तर पर ही समय सीमा तय की जाएगी, जिससे फॉरेस्ट क्लीयरेंस और निर्माण कार्यों में होने वाली अनावश्यक देरी को रोका जा सकेगा।
