ग्लोबल एनर्जी रिलीफ: अमेरिकी पाबंदी हटने से क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? ईरानी तेल की सप्लाई और ‘ट्रंप कार्ड’ का पूरा विश्लेषण
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार के लिए राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संकेतों और ट्रेजरी विभाग द्वारा ईरानी तेल पर पाबंदियों में 19 अप्रैल, 2026 तक ढील देने के फैसले से कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद है। $108 के पार जा चुके ब्रेंट क्रूड के दामों में इस फैसले के बाद नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
एनर्जी क्राइसिस: वर्तमान स्थिति और बदलाव का गणित
पिछले कुछ हफ्तों में इजरायल और ईरान के बीच हुए हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया था। नीचे दी गई तालिका से समझें कि स्थिति कितनी गंभीर थी और अब क्या बदलाव होने की संभावना है:
| मानक (Parameters) | संकट के दौरान (जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम) | अमेरिकी फैसले के बाद की संभावना |
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | $108.65 प्रति बैरल | कीमतों में गिरावट (Supply बढ़ने से) |
| नेचुरल गैस (यूरोप) | 13% का उछाल (एक दिन में) | सप्लाई स्थिर होने पर दामों में कमी |
| सप्लाई वॉल्यूम | ‘फोर्स मेज्योर’ और तनाव से भारी कमी | बाजार में 14 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल |
| होर्मुज जलडमरूमध्य | सैन्य हलचल से लगभग ठप | जापान और अन्य सहयोगी देशों के लिए सुरक्षित |
क्यों बदला अमेरिका का रुख?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर स्पष्ट किया कि अमेरिका अब अकेले समुद्री रास्तों (Strait of Hormuz) की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं उठाएगा। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट का मानना है कि इस अस्थायी ढील से न केवल चीन को मिलने वाले ‘ब्लैक मार्केट’ तेल पर लगाम लगेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी भी आएगी।
