दिल्ली में ‘गैस संकट’ का कहर: थाली से दूर हुई रोटी, पलायन को मजबूर हुए प्रवासी मजदूर; 400 रुपये किलो तक बिकी LPG
नई दिल्ली। देश की राजधानी में एलपीजी (LPG) संकट ने प्रवासी मजदूरों की जिंदगी को बुरी तरह झकझोर दिया है। आलम यह है कि आनंद विहार और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर घर लौटने वाले मजदूरों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कमरतोड़ महंगाई और गैस की किल्लत के बीच मजदूरों का कहना है कि 400 रुपये दिहाड़ी कमाने वाला व्यक्ति अगर 400 रुपये किलो गैस खरीदेगा, तो गांव में अपने बच्चों को क्या भेजेगा?
मकान मालिकों की बेरुखी और भूख की मार
जमशेदपुर के करम चंद और बिलासपुर के शोएब जैसे हजारों मजदूरों की व्यथा एक जैसी है। गैस सिलिंडर 3500 से 4000 रुपये में मिल रहा है। अगर मजदूर विकल्प के तौर पर लकड़ी या कोयला जलाना चाहते हैं, तो मकान मालिक प्रदूषण और गंदगी का हवाला देकर मना कर देते हैं। ऐसे में भूखे पेट रहने से बेहतर मजदूरों ने अपने गांव लौटना ही उचित समझा है। बिहार के अनिल कहते हैं, “13 हजार की तनख्वाह में आटा-तेल खरीदें या सिलिंडर? गांव वापस जाना ही हमारी मजबूरी है।”
शादियों के मेन्यू में कटौती और ढाबों पर ताले
गैस संकट की आंच अब दिल्ली की शादियों और खान-पान के कारोबार तक पहुँच गई है। कैटरिंग संचालकों का कहना है कि लोग अब व्यंजनों में 30 से 40 फीसदी तक की कटौती कर रहे हैं। वहीं, पहाड़गंज और मयूर विहार जैसे इलाकों में चाय विक्रेताओं को इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है।
सरकार का दावा: कोटा किया दोगुना
हालात बिगड़ते देख दिल्ली के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बड़ी घोषणा की है। सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए कमर्शियल एलपीजी कोटा 180 से बढ़ाकर 360 सिलिंडर प्रतिदिन कर दिया है। साथ ही 5 किलो वाले छोटे सिलिंडरों की आपूर्ति भी बढ़ाई गई है। वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके।
