लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष २०२६-२७ के लिए अपना अब तक का सबसे विशाल बजट पेश कर दिया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा सदन में प्रस्तुत किए गए ९,१२,६९६ करोड़ रुपये के इस बजट में आगामी चुनावों की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है। पिछले वर्ष की तुलना में बजट के आकार में १२ प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ की ओर ले जाना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान प्रदेश सरकार ने सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शिक्षा क्षेत्र को कुल बजट का १२.४ प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवाओं को ६ प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया है। सरकार का तर्क है कि स्वस्थ और शिक्षित कार्यबल ही राज्य की आर्थिक प्रगति की आधारशिला बनेगा। इसके अतिरिक्त, पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए १९.५ प्रतिशत का प्रावधान किया गया है, जो दीर्घकालिक संपत्तियों के निर्माण में सहायक होगा।
सड़कों का जाल और नई योजनाओं की सौगात बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए सरकार ने सड़क और सेतु निर्माण के लिए ३४,४६८ करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। इसमें सड़कों के चौड़ीकरण और नए निर्माण के लिए पृथक से ३,००० करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सिंचाई परियोजनाओं के लिए १८,००० करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट की सबसे बड़ी विशेषता ४३,००० करोड़ रुपये की नई योजनाओं का शुभारंभ है, जो प्रदेश के विभिन्न वर्गों को सीधे लाभान्वित करेंगी।
युवाओं के लिए रोजगार और कौशल संवर्धन वित्त मंत्री ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि हस्तकौशल और निपुणता प्राप्त व्यक्ति कभी बेरोजगार नहीं रह सकता। इसी मिशन के तहत ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के लिए १,००० करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में अब तक ५० लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) हस्ताक्षरित हो चुके हैं, जिससे लगभग १० लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप का ‘हब’ बनता यूपी उत्तर प्रदेश अब भारत के मोबाइल फोन विनिर्माण का केंद्र बन चुका है। देश के कुल मोबाइल उत्पादन का ६५ प्रतिशत हिस्सा अकेले यूपी से आता है। यही नहीं, भारत की ५५ प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ४४,७४४ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। स्टार्टअप रैंकिंग में भी उत्तर प्रदेश को ‘लीडर श्रेणी’ प्राप्त हुई है।
स्मार्ट सिटी और नागरिक उड्डयन अयोध्या सहित प्रदेश के ७ प्रमुख नगर निगमों (फिरोजाबाद, गोरखपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृंदावन, मेरठ और शाहजहांपुर) को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए विशेष पहल की गई है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास के लिए २,१११ करोड़ रुपये और नई हवाई पट्टियों के निर्माण हेतु १,१०० करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इज ऑफ डूइंग बिजनेस: उद्योगों को प्रोत्साहन व्यापार को सुगम बनाने के लिए ‘जनविश्वास सिद्धांत’ को लागू किया जा रहा है। इसके तहत उद्योगों के लिए पंजीकरण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।
