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गुंडा एक्ट, NSA और गैंगस्टर के तहत हुई कड़ी कार्रवाई; 2020 के नए कानून ने बदली उत्तर प्रदेश में अपराध की तस्वीर।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत गोकशी और गो-तस्करी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में गो-वंश की रक्षा के लिए न केवल कानूनी शिकंजा कसा गया है, बल्कि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी की गई है। साल 2020 में गोवध निवारण कानून में किए गए संशोधनों के बाद से पुलिस प्रशासन ने इस दिशा में अभूतपूर्व तत्परता दिखाई है।

सख्त कानूनों का प्रहार: एक नजर में आंकड़े

प्रशासन ने केवल मामले दर्ज नहीं किए, बल्कि अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसे कड़े प्रावधानों का भी उपयोग किया है।

कार्रवाई का प्रकार मामलों/आरोपियों की संख्या
कुल दर्ज मामले 14,182
कुल गिरफ्तार आरोपी 35,924
गैंगस्टर एक्ट के तहत मामले 14,305
गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई 13,793
NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) 178
जब्त संपत्ति (अनुमानित) ₹83.32 करोड़

आर्थिक प्रहार: अपराधियों की संपत्ति पर ‘बुलडोजर’ और जब्ती

गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) का प्रयोग करते हुए प्रशासन ने उन अपराधियों को निशाना बनाया है जिन्होंने गो-तस्करी के जरिए अवैध रूप से करोड़ों की संपत्ति खड़ी की थी। ₹83 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त करने का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराध के सिंडिकेट को आर्थिक रूप से पंगु बनाना है।

उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अधिनियम 2020 के मुख्य प्रावधान:

सरकार ने कानून को इतना सख्त कर दिया है कि अब अपराधी आसानी से बच नहीं पा रहे हैं:

  • कठोर कारावास: गो-हत्या पर अब 10 साल तक की जेल हो सकती है।

  • भारी जुर्माना: अपराध की गंभीरता के आधार पर ₹3 लाख से ₹5 लाख तक का जुर्माना।

  • अंग-भंग पर सजा: गोवंश को शारीरिक नुकसान पहुँचाने पर 7 साल की जेल और ₹3 लाख जुर्माने का प्रावधान है।

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