उत्तराखंड में इंसानियत का चेहरा बने दीपक कुमार: राहुल गांधी ने बताया ‘भारत का हीरो’, नफरत के खिलाफ खड़े होने पर मिल रही धमकियां

कोटद्वार/रुद्रपुर। देवभूमि उत्तराखंड के कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष में तब्दील हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में दीपक कुमार नामक युवक हैं, जिन्होंने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के साथ हुई बदसलूकी का साहसपूर्वक विरोध किया। इस घटना के बाद जहां एक ओर दीपक कुमार को जान से मारने की धमकियां मिलने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रमुख विपक्षी नेता राहुल गांधी ने उनके समर्थन में उतरकर उन्हें ‘भारत का हीरो’ करार दिया है।

विवाद की जड़: दुकान का नाम और पहचान घटना 26 जनवरी की बताई जा रही है, जब कोटद्वार के पटेल मार्ग पर ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ नामक दुकान पर कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। 70 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार वकील अहमद, जो पिछले 30 वर्षों से यह दुकान चला रहे हैं, उन पर दबाव बनाया गया कि वे अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटा दें। दलील दी गई कि ‘बाबा’ शब्द एक विशिष्ट धार्मिक पहचान से जुड़ा है।

साहस की मिसाल: “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है” जब भीड़ बुजुर्ग दुकानदार को डरा रही थी, तब पास ही जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे और इस बेतुके विरोध का डटकर मुकाबला किया। जब भीड़ ने उनसे उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने भाईचारे का संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक रूप से स्वयं को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। उनके इस हस्तक्षेप के बाद भीड़ को पीछे हटना पड़ा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

राहुल गांधी का समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रिया लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दीपक कुमार की प्रशंसा करते हुए लिखा, “उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं। वे उस संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं जिसे कुचलने की साजिश रची जा रही है।” गांधी ने दीपक को ‘बब्बर शेर’ बताते हुए उनके प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की।

सुरक्षा पर सवाल और पुलिसिया कार्रवाई विडंबना यह है कि जिस दीपक कुमार ने एक बुजुर्ग की गरिमा की रक्षा की, अब उन्हीं के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। दीपक कुमार का आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को संगठित रूप से धमकियां दी जा रही हैं और प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण है। कोटद्वार में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

यह मामला केवल एक दुकान के नाम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने उत्तराखंड में सामाजिक ध्रुवीकरण और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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