कंप्यूटर साइंस में बीटेक के बाद डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए कर बने बैच के सर्वश्रेष्ठ छात्र
रुद्रपुर। भारत के शीर्ष बिजनेस स्कूलों के प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी धाक जमाना आसान नहीं होता, लेकिन काठगोदाम और रुद्रपुर में पले-बढ़े शिखर कन्नौजिया ने दृढ़ संकल्प की एक नई मिसाल पेश की है। प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड से पूरी करने के बाद, शिखर ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर एक मजबूत तकनीकी आधार तैयार किया। उनकी दूरदृष्टि सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को उन्नत कॉर्पाेरेट रणनीतियों के साथ जोड़ना चाहते थे। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) बोधगया में डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट से अपना एमबीए पूरा किया।
शिऽर की अथक मेहनत और समर्पण चार अप्रैल 2026 को आईआईएम बोधगया के आठवें वार्षिक दीक्षांत समारोह के भव्य मंच पर तब रंग लाई, जब उन्हें अपने बैच के सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ आशीषकुमार चौहान और आईआईएम बोधगया की निदेशक डॉ विनीता सहाय ने शिखर को यह सर्वाेच्च सम्मान प्रदान किया। शिखर का यह स्वर्ण पदक न केवल उनके किताबी ज्ञान का, बल्कि उनके बहुमुखी नेतृत्व और समग्र विकास का प्रमाण है। उन्होंने एमबीए की पढ़ाई के दौरान शिक्षा जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए प्रतिष्ठित प्रकाशक एल्सेवियर की एक पुस्तक में अपना शोध अध्याय प्रकाशित किया।
इसके अलावा, शिखर ने कैंपस में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संबंध समिति के जरिए संस्थान के लिए महत्वपूर्ण साझेदारियां बनाने में अहम योगदान दिया और टीईडीएक्स जैसे प्रमुख आयोजनों का सफल नेतृत्व किया। भौगोलिक बाधाओं की पुरानी धारणा को तोड़ते हुए, सर्वाेच्च सम्मान और प्रकाशित शोध के साथ कॉर्पाेरेट जगत में कदम रखने वाले शिखर कन्नौजिया की यह सफलता उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणा है। उनकी इस उपलब्धि पर उत्तराखंड में खुशी की लहर है।
