नई दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में प्रशासनिक लापरवाही का आलम थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोहिणी सेक्टर-32 में खुले मैनहोल में गिरकर बिरजू नामक व्यक्ति की दुखद मृत्यु के अभी महज दो दिन ही बीते थे कि उसी स्थान से मात्र 200 मीटर की दूरी पर एक और युवक खुले नाले का शिकार हो गया। गनीमत यह रही कि स्थानीय लोगों की तत्परता और स्वयं के संघर्ष से युवक की जान बच गई, अन्यथा दिल्ली एक और निर्दोष की जान जाने की गवाह बनती।
घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है, जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जी खरीदने निकला था। अंधेरा होने के कारण वह नाले पर बिना स्लैब वाले हिस्से को देख नहीं पाया और सीधे गहरे नाले में जा गिरा। पति को आंखों के सामने समाते देख पत्नी ने शोर मचाना शुरू किया, जिसके बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई।
चश्मदीदों के अनुसार, नाले में गिरा शख्स खुद लोहे के एंगल को पकड़कर बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था, जिसे देख लोगों ने उसका हौसला बढ़ाया और उसे सुरक्षित बाहर खींच लिया। हादसे में युवक के हाथ और पैर में चोटें आई हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में शुक्रवार को अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और क्षेत्र की घेराबंदी करवाई।
गौरतलब है कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले जनकपुरी में भी जल बोर्ड की लापरवाही के कारण एक युवक अपनी जान गंवा चुका है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विभाग केवल बड़े हादसों के बाद ही क्यों जागता है? खुले नाले और मैनहोल आज भी राहगीरों के लिए ‘मौत के कुएं’ बने हुए हैं, जो दिल्ली जैसे महानगर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल रहे हैं।
