कानपुर में ‘किडनी’ का काला कारोबार: 10 लाख में खरीदी, 90 लाख में बेची; दिल्ली-मुंबई से बुलाए जाते थे स्पेशलिस्ट, 10 गिरफ्तार
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी में खुलासा हुआ है कि कैसे दलाल और डॉक्टर मिलकर जरूरतमंदों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। इस खेल में उत्तराखंड के एक युवक की किडनी महज 10 लाख रुपये में खरीदी गई और एक मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दी गई। पुलिस ने अब तक एक डॉक्टर दंपती और अस्पताल संचालक समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया है।
रिश्तेदार बताकर होता था सौदा, 50 हजार के विवाद में खुला राज
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब दलाल शिवम अग्रवाल ने उत्तराखंड के डोनर को तयशुदा 10 लाख में से 50 हजार रुपये देने में आनाकानी की। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस से कर दी, जिसके बाद परत दर परत इस काले धंधे की सच्चाई सामने आती गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए वे किडनी डोनर को मरीज का ‘करीबी रिश्तेदार’ बताते थे।
अस्पतालों का मायाजाल: पथरी बताकर करते थे भर्ती
जांच में सामने आया है कि बर्रा, नौबस्ता, पनकी और कल्याणपुर जैसे इलाकों के अस्पतालों में यह खेल चल रहा था।
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फर्जी बीमारी: डोनर और मरीज को गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों का रोगी बताकर भर्ती किया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
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स्पेशलिस्ट टीम: ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से बड़े नेफ्रोलॉजिस्ट और यूरोलॉजी एक्सपर्ट्स की टीम बुलाई जाती थी।
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बंद अस्पतालों का इस्तेमाल: पुलिस को एक डोनर ‘आरोही हॉस्पिटल’ में भर्ती मिला, जो कागजों में दो महीने पहले ही बंद हो चुका था।
22 साल पुराना इतिहास और रसूखदारों के नाम
कानपुर में किडनी चोरी का यह पहला मामला नहीं है। ठीक 22 साल पहले भी शहर के एक पॉश इलाके के नर्सिंग होम में ऐसा ही रैकेट पकड़ा गया था। ताजा मामले में भी आईएमए (IMA) के एक बड़े पदाधिकारी के अस्पताल का नाम चर्चा में है, जिसकी भूमिका की जांच पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देशन में क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस की टीमें अब हरियाणा और पश्चिम बंगाल भी रवाना की गई हैं, क्योंकि वहां के भी कई युवकों के इस रैकेट के जाल में फंसे होने की आशंका है।
