PPC का नया स्वरूप: राज्यों के दौर पर प्रधानमंत्री, परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए साझा किए अनुभव

कोयंबटूर, तमिलनाडु : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के दूसरे महत्वपूर्ण पड़ाव के अंतर्गत तमिलनाडु के कोयंबटूर में विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया। कार्यक्रम के इस नौवें संस्करण में एक नई परंपरा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों के बीच पहुँचकर उनके अनुभवों और जिज्ञासाओं को सुना। इस दौरान कोयंबटूर के विद्यार्थियों में एक अभूतपूर्व उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली।

तमिलनाडु की ऊर्जा और जिज्ञासा की सराहना विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की समृद्ध संस्कृति और यहाँ के छात्रों की जिज्ञासु प्रवृत्ति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के युवाओं में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा और कुछ नया सीखने की ललक होती है, जो देश के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। संवाद की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने बेहद आत्मीय भाव से बच्चों से उनके खान-पान के विषय में पूछा, जिससे कार्यक्रम का वातावरण सहज और तनावमुक्त हो गया।

‘छात्रों से सीखने की कला’ प्रधानमंत्री ने एक अनुभवी मार्गदर्शक की भाँति छात्रों से कहा, “मैं यहाँ आपको केवल उपदेश देने नहीं, बल्कि आपसे कुछ सीखने और आपकी बातें सुनने आया हूँ।” उन्होंने स्पष्ट किया कि विगत कई वर्षों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ का आयोजन वह अपनी व्यक्तिगत शिक्षा और युवा मस्तिष्क को समझने के उद्देश्य से भी करते आ रहे हैं।

PPC 2026 का अनूठा स्वरूप इस वर्ष की ‘परीक्षा पे चर्चा’ अपने पिछले संस्करणों से काफी भिन्न और व्यापक है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कई छात्रों ने सुझाव दिया था कि यह कार्यक्रम केवल दिल्ली तक सीमित न रहकर देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित होना चाहिए। इसी सुझाव को स्वीकार करते हुए इस बार 9वें एडिशन के तहत प्रधानमंत्री स्वयं अलग-अलग राज्यों के बच्चों के बीच पहुँच रहे हैं।

सफलता के मूल मंत्र: मौलिकता और संतुलन उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम श्रृंखला की शुरुआत 6 फरवरी को हुई थी। कोयंबटूर में संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचि (हॉबी) को जीवित रखने का सुझाव दिया। उन्होंने तकनीक और इंटरनेट के संतुलित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को किसी की नकल करने के बजाय अपनी मौलिक शैली विकसित करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री का यह संवाद न केवल छात्रों के परीक्षा संबंधी तनाव को कम करने में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए आत्मविश्वास भी प्रदान कर रहा है।

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