नई दिल्ली/जम्मू: भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पड़ोसी मुल्क को एक और कड़ा संदेश देने की तैयारी कर ली है। सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित करने के ऐतिहासिक कदम के बाद, अब भारत रावी नदी के उस अतिरिक्त जल को भी पूरी तरह रोकने की योजना पर काम कर रहा है, जो अब तक बहकर पाकिस्तान चला जाता था। इस रणनीतिक कदम से न केवल पाकिस्तान का जल संकट गहरा सकता है, बल्कि भारत के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीर भी बदल सकती है।
शाहपुर कंडी बांध: 45 साल का इंतज़ार खत्म जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी बांध परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने पुष्टि की है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्य आगामी 31 मार्च तक पूर्ण होने की संभावना है। इस बांध के चालू होते ही रावी नदी के पानी पर भारत का पूर्ण नियंत्रण होगा, जिससे पाकिस्तान की तरफ होने वाले अतिरिक्त जल प्रवाह को शून्य किया जा सकेगा।
कठुआ और सांबा के लिए संजीवनी इस परियोजना का सीधा लाभ जम्मू-कश्मीर के सूखा प्रभावित कठुआ और सांबा जिलों को मिलेगा। मंत्री जावेद अहमद राना के अनुसार, “पाकिस्तान जाने वाले अतिरिक्त पानी को रोकना हमारी प्राथमिकता है। इस पानी को कंडी क्षेत्र की ओर डायवर्ट किया जाएगा, जिससे हजारों एकड़ बंजर भूमि को सिंचाई का जल मिल सकेगा।” आंकड़ों के मुताबिक, इस बांध से पंजाब की 5,000 हेक्टेयर और जम्मू क्षेत्र की 32,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी।
परियोजना का इतिहास और सामरिक महत्व शाहपुर कंडी बांध की आधारशिला वर्ष 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच अंतर्राज्यीय विवादों के कारण यह दशकों तक लंबित रही। साल 2008 में इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित किया गया। लगभग 3,394 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह बांध 55 मीटर ऊंचा और 7.7 किलोमीटर लंबा है।
सिंधु जल संधि और भारत का अधिकार पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रावी नदी के जल पर भारत का अनन्य अधिकार है। सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत रावी, ब्यास और सतलज का पानी भारत के हिस्से में आता है। वर्तमान परिस्थितियों में, जब भारत ने संधि की समीक्षा और निलंबन के संकेत दिए हैं, शाहपुर कंडी बांध का पूर्ण होना पाकिस्तान के लिए एक बड़ी सामरिक और आर्थिक चुनौती साबित होने वाला है।
