सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर पुलिस पर लगाए थे प्रताड़ना के आरोप; 26 लोगों के खिलाफ दर्ज है मुकदमा, हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत।
काशीपुर। उत्तराखंड के बहुचर्चित किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच लगभग 90 प्रतिशत पूरी कर ली है। आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे के नेतृत्व में चल रही इस उच्च स्तरीय जांच की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार और डीजीपी को सौंपी जाएगी। एसआईटी के रडार पर मुख्य रूप से आठ आरोपी हैं, जिनके खिलाफ साक्ष्य संकलन का कार्य अंतिम दौर में है। हालांकि, मामले के सभी आरोपी वर्तमान में कानूनी शरण लेकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
यह मामला 10 जनवरी की रात का है, जब काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह ने गौलापार स्थित एक होटल में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। मरने से पहले सुखवंत ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था, जिसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर दूसरे पक्ष के साथ मिलकर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया था। इस घटना के मूल में चार करोड़ रुपये की कथित जमीन धोखाधड़ी का विवाद बताया जा रहा है। मृतक के भाई परविंदर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने कुल 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
इस प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद शासन ने कड़ी कार्रवाई की थी। तत्कालीन एसएसपी मणिकांत मिश्रा को जिले से हटाकर देहरादून भेज दिया गया, जबकि आईटीआई थाना प्रभारी और एक उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया। साथ ही, पैगा चौकी प्रभारी समेत 10 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर गढ़वाल परिक्षेत्र भेज दिया गया था। एसआईटी अब तक घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों और परिजनों के बयान दर्ज कर चुकी है।
कानूनी मोर्चे पर, मामले के 26 आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई रसूखदारों और पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग और किसान संगठन मामले में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
