केसों की कमी का हवाला देकर निजी कंपनी ने समेटी सेवाएं; सात महीने बाद बहाल हुई सुविधा फिर हुई बंद।
काशीपुर। स्थानीय एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। आयुष्मान कार्ड बनाने वाली अनुबंधित निजी कंपनी ने अस्पताल में अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। कंपनी का तर्क है कि अस्पताल में आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए पर्याप्त केस नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण इस केंद्र को संचालित करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इस अचानक हुए फैसले से दूर-दराज से आने वाले निर्धन मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए एक निजी कंपनी के माध्यम से आयुष्मान मित्र की तैनाती की थी। यह व्यवस्था पहले मार्च 2025 में बंद हो गई थी, जिसे लंबी प्रतीक्षा के बाद नवंबर में दोबारा शुरू किया गया था। राइटर कंपनी के तहत तैनात आयुष्मान मित्र संजीव मौर्य ने बताया कि शुरुआत में प्रतिदिन तीन-चार कार्ड बन रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या घटकर महीने में मात्र 10 से 15 केस तक सिमट गई। अस्पताल में सर्जन की उपलब्धता के बावजूद केसों की इस भारी कमी को आधार बनाकर कंपनी ने अपना कामकाज समेट लिया है।
अस्पताल में कार्ड बनने बंद होने से उन मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है, जो इलाज के लिए पूरी तरह सरकारी योजना पर निर्भर हैं। अब उन्हें निजी केंद्रों या जनसेवा केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जहाँ अक्सर तकनीकी खामियों या भीड़ के कारण काम समय पर नहीं हो पाता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पताल जैसी जगह पर इस महत्वपूर्ण सेवा का बंद होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है। विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड सेवा बंद होने के कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। साथ ही, अनुबंधित कंपनी के समन्वयक को कड़े निर्देश दिए जाएंगे कि वे जल्द से जल्द आयुष्मान मित्र की पुनः तैनाती सुनिश्चित करें, ताकि गरीब मरीजों को बिना किसी बाधा के निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सके।
