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भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन; न्यूनतम पेंशन ₹7500 करने और संविदा कर्मियों के लिए नीति बनाने की उठाई पुरजोर मांग।

अल्मोड़ा। विभिन्न श्रम संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। बुधवार को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में एकत्रित हुए और धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी बुनियादी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने स्कीम वर्कर और ठेका श्रमिकों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि इन श्रमिकों के स्थायीकरण के लिए सरकार को तत्काल एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। साथ ही, सामान्य भर्ती पर लगी रोक को हटाकर युवाओं के लिए रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने और चार नए लेबर कोड में श्रमिक हितों की सुरक्षा की गारंटी देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि त्रिपक्षीय तंत्र को मजबूत करने के लिए इंडियन लेबर कांफ्रेंस का आयोजन अनिवार्य है।

आर्थिक सुरक्षा पर जोर देते हुए संगठन ने ईपीएस-95 (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की, जिसे महंगाई भत्ते के साथ लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी पुरजोर तरीके से रखी गई। प्रस्ताव में कार्यकर्ताओं के लिए 24 हजार रुपये और सहायिकाओं के लिए 12 हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने के साथ ही 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को वरिष्ठता लाभ देने की बात कही गई।

प्रदर्शन के दौरान प्रदेश मंत्री भगवती बिष्ट सहित रेनू, शशि देवी और दीपा नैनवाल जैसे प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि बोनस भुगतान अधिनियम 1965 की सीमा में वृद्धि और अन्य श्रम सुधारों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन के लिए विवश होगा। इस दौरान तारा फुलोरिया, गौरा कोहली और जानकी सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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