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 जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, न केवल इंसानों बल्कि मशीनों की सहनशक्ति की भी परीक्षा शुरू हो गई है। गर्मियों के मौसम में कार मालिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इंजन का ओवरहीट (Overheat) होना है। तेज धूप, ट्रैफिक जाम और लगातार एसी का इस्तेमाल इंजन पर भारी दबाव डालता है। यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो एक छोटी सी लापरवाही इंजन को ‘सीज’ कर सकती है, जिससे आपकी जेब पर हजारों-लाखों का फटका लग सकता है।

इंजन क्यों बन जाता है आग का गोला?

कार का इंजन काम करते समय आंतरिक दहन (Internal Combustion) के कारण पहले से ही काफी ऊष्मा पैदा करता है। इसे सामान्य रखने के लिए कूलिंग सिस्टम जिम्मेदार होता है। जब बाहर का तापमान 40 डिग्री के पार जाता है और कूलिंग सिस्टम (रेडिएटर या कूलेंट) में कोई खामी होती है, तो इंजन अपनी गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता और ओवरहीटिंग का शिकार हो जाता है।

इंजन की ‘सेहत’ के लिए अपनाएं ये 5 जरूरी टिप्स

फीचर क्या करें? क्यों है जरूरी?
कूलेंट (Coolant) लेवल चेक करें और केवल कंपनी का कूलेंट ही डालें। यह इंजन की गर्मी को सोखकर रेडिएटर तक ले जाता है।
रेडिएटर (Radiator) धूल और गंदगी साफ करवाएं, लीकेज चेक करें। रेडिएटर चोक होने से हवा का बहाव रुक जाता है और कूलिंग ठप हो जाती है।
इंजन ऑयल समय पर बदलें और गुणवत्ता सुनिश्चित करें। खराब तेल घर्षण (friction) बढ़ाता है, जिससे गर्मी बढ़ती है।
आइडलिंग (Idling) ट्रैफिक में लंबे समय तक इंजन चालू न रखें। खड़े वाहन में एयरफ्लो कम होता है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।
डैशबोर्ड गेज टेम्परेचर गेज की सुई पर हमेशा नजर रखें। यह आपके इंजन का ‘थर्मामीटर’ है, लाल निशान मतलब खतरा।

चेतावनी: यदि ड्राइविंग के दौरान बोनट से धुआं निकले या गेज लाल निशान पर पहुंच जाए, तो तुरंत गाड़ी रोकें। सावधान रहें: कभी भी गर्म इंजन का रेडिएटर कैप न खोलें, उबलता हुआ कूलेंट आपको गंभीर रूप से जला सकता है।

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