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काशीपुर/हरिद्वार

उत्तराखंड के गन्ना किसानों ने अपनी लंबित मांगों और क्रय केंद्रों के आवंटन को लेकर सोमवार को गन्ना आयुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले हरिद्वार, बाजपुर और काशीपुर के सैकड़ों किसान लामबंद होकर गन्ना आयुक्त कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन घेराव शुरू कर दिया।

चूल्हा-चौका लेकर पहुंचे किसान, दफ्तर में ही डाला डेरा आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान अपने साथ गैस सिलेंडर और चूल्हा लेकर पहुंचे थे। किसानों का स्पष्ट रुख था कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, वे कार्यालय परिसर नहीं छोड़ेंगे। घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी किसान गन्ना आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया के कार्यालय के भीतर ही डटे रहे, ताकि कोई भी अधिकारी बिना वार्ता के बाहर न जा सके।

क्रय केंद्रों के हस्तांतरण पर अड़े रहे अन्नदाता मुख्य विवाद हरिद्वार जनपद में दस नए गन्ना क्रय केंद्र खोलने और लक्सर चीनी मिल के अधीन आने वाले ‘रायसी’, ‘रानीमजरा’ और ‘सैदादाग’ केंद्रों को लिब्बरहेड़ी चीनी मिल को हस्तांतरित करने को लेकर था। किसानों का तर्क है कि मिलों के बीच सही तालमेल न होने और क्रय केंद्रों की कमी के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है।

देर शाम वार्ता सफल, तीन केंद्रों पर बनी सहमति गन्ना आयुक्त और किसान प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की लंबी वार्ता चली। आखिरकार, देर शाम प्रशासन और किसानों के बीच एक मध्यमार्ग निकला। अधिकारियों ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल प्रभाव से तीन नए क्रय केंद्र खोलने पर अपनी सहमति दे दी। इस आश्वासन और लिखित सहमति के बाद भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह शास्त्री ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।

आंदोलन के दौरान शीतल सिंह, चौधरी रवि कुमार, प्रेम सिंह सहोता और बलजिन्दर सिंह संधू सहित भारी संख्या में किसान नेता मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर बकाया भुगतान और केंद्रों के संचालन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे पुनः उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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