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मिडल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: कच्चे तेल की कीमतें $115 के पार; ईरान के सर्वोच्च नेता को लेकर उड़ती खबरों ने वैश्विक बाजारों में मचाया कोहराम।

नई दिल्ली/टोक्यो (9 मार्च, 2026): सोमवार की सुबह वैश्विक निवेशकों के लिए एक भयावह ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुई है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आए 25% के जबरदस्त उछाल ने एशियाई शेयर बाजारों की कमर तोड़ दी है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख बाजारों में 7% से अधिक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

बाजारों का हाल: कहां कितनी गिरावट?

आज सुबह के कारोबार में प्रमुख एशियाई सूचकांकों की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:

इंडेक्स (Index) देश गिरावट (%) वर्तमान स्तर
Nikkei 225 जापान -7.00% 52,010
KOSPI दक्षिण कोरिया -7.43%
Taiwan Weighted ताइवान -5.00%
Hang Seng हॉन्गकॉन्ग -2.00%
STI सिंगापुर -2.15%

गिरावट के 3 मुख्य कारण

  1. कच्चे तेल में ‘विस्फोट’: सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमतें 25% उछलकर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। निवेशकों को डर है कि सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई अनियंत्रित हो जाएगी।

  2. ईरान-इजरायल युद्ध का खतरा: अमेरिका और इजरायल के साझा हमलों के बाद स्थिति बेकाबू है। सबसे बड़ी चिंता ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से जुड़ी अपुष्ट खबरों को लेकर है, जिसने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

  3. एनर्जी क्राइसिस (ऊर्जा संकट): पश्चिम एशिया में टकराव का सीधा मतलब है दुनिया की तेल सप्लाई लाइन पर खतरा। निवेशकों ने जोखिम भांपते हुए इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना) की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडल ईस्ट से स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बनी रहेगी। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है

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