अलर्ट: ‘सिंथेटिक ड्रग्स’ का नया ग्लोबल हब बनता भारत; नार्को-टेररिज्म और मनी लॉन्ड्रिंग से देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा— एलजी संधू
नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर एक बेहद गंभीर और डरावनी तस्वीर पेश की है। ‘काउंटरिंग नार्को-टेररिज्म’ पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए एलजी संधू ने चेतावनी दी कि भारत अब केवल ड्रग्स तस्करी का रास्ता (Transit Route) नहीं रह गया है, बल्कि यह अब सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन और वितरण का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया।
ड्रग्स का पैसा और टेरर फंडिंग का गठजोड़
एलजी संधू ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों का कारोबार अब केवल एक अपराध नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था को खोखला करने वाला षडयंत्र बन चुका है। वैश्विक स्तर पर अरबों डॉलर का यह काला कारोबार संगठित अपराध और आतंकवाद को फंड कर रहा है। ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता पर प्रहार है।
मेथामफेटामाइन: युवाओं की रगों में घुलता जहर
भारत में मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) और एम्फेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की रिकॉर्ड बरामदगी पर चिंता जताते हुए एलजी ने कहा कि देश के अलग-अलग इलाकों में इनकी मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यहाँ इनके प्रोडक्शन यूनिट्स सक्रिय हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ा रही है, बल्कि देश की युवा शक्ति की कार्यक्षमता को भी खत्म कर रही है।
समाधान: बहु-आयामी रणनीति की जरूरत
एलजी संधू ने इस खतरे से निपटने के लिए इंटेलिजेंस शेयरिंग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वित्तीय निगरानी तंत्र और पब्लिक हेल्थ सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना एक साझा और प्रभावी रणनीति के, संगठित नार्को-नेटवर्क को तोड़ पाना असंभव है।
