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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रतिष्ठित संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जिला अदालत के पाक्सो (POCSO) एक्ट कोर्ट के आदेश पर झूंसी पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद सहित चार लोगों के विरुद्ध नाबालिग बच्चों के साथ कुकर्म और यौन शोषण के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है।

यह पूरी कार्रवाई शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा अदालत में दायर की गई अर्जी के आधार पर हुई है। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि माघ मेले और हाल ही में संपन्न हुए महाकुंभ 2025 के दौरान शिविरों और गाड़ियों में नाबालिग लड़कों का शारीरिक शोषण किया गया। कोर्ट में पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज होने के बाद विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए पुलिस को तत्काल और निष्पक्ष विवेचना के आदेश दिए हैं।

दर्ज मामले के अनुसार, नाबालिगों पर ‘गुरु सेवा’ के नाम पर दबाव बनाया जाता था और धार्मिक आस्था की आड़ लेकर उनके साथ गलत काम किया जाता था। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों द्वारा बच्चों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि गुरु की सेवा से उन्हें आशीर्वाद मिलेगा, जबकि वास्तविकता में उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध साक्ष्य और पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की पुष्टि करती है।

झूंसी थानाध्यक्ष महेश मिश्रा ने पुष्टि की है कि अदालत के निर्देशानुसार मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की गहन विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस अब साक्ष्यों और पीड़ितों के विस्तृत बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। कोर्ट ने पुलिस को यह भी हिदायत दी है कि जांच के दौरान पीड़ितों की पहचान और गरिमा का पूर्ण ध्यान रखा जाए।

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