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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: “मक्का-मदीना में हिंदू नहीं जा सकते, तो हमारे तीर्थों में गैर-सनातनी क्यों?”— देवकीनंदन ठाकुर ने उठाई ‘सनातन बोर्ड’ की मांग

रुद्रपुर/देहरादून। प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने एक विशेष साक्षात्कार में देश के तीर्थ स्थलों की सुरक्षा और सनातनी परंपराओं को लेकर बेबाक राय रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि देश में ‘वक्फ बोर्ड’ अस्तित्व में रह सकता है, तो ‘सनातन बोर्ड’ का गठन क्यों नहीं हो सकता? उन्होंने चारधाम की तर्ज पर भारत के सभी प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों में गैर-सनातनी प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत की है।

मक्का-मदीना का दिया उदाहरण, सुरक्षा पर जताई चिंता

साक्षात्कार के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने तर्क दिया, “जब मक्का और मदीना जैसे स्थलों में हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, तो मथुरा, अयोध्या और अन्य पावन तीर्थों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक क्यों नहीं होनी चाहिए?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने तीर्थों और ‘बहन-बेटियों’ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने मंदिरों के चढ़ावे और संपत्ति पर सरकारी नियंत्रण का विरोध करते हुए कहा कि यह पैसा केवल सनातन के उत्थान और गुरुकुलों के निर्माण में लगना चाहिए।

तिलक लगाना मात्र धर्म नहीं, आचरण में उतारना जरूरी

आध्यात्मिक गुरु ने आधुनिक धार्मिक दिखावे पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि केवल तिलक लगा लेना या मंदिर हो आना किसी को धार्मिक नहीं बनाता। असली धार्मिकता ग्रंथों और पुराणों के ज्ञान को जीवन में उतारने से आती है। उन्होंने अफसोस जताया कि लोग भगवान राम की कथा तो सुनते हैं, लेकिन उनके जैसा आचरण (मर्यादा पुरुषोत्तम) नहीं अपनाना चाहते।

पारिवारिक मूल्यों पर संदेश: “बेटी लाए हो, नौकरानी नहीं”

आज के दौर में टूटते परिवारों और कम होती सहनशीलता पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि पति का परम दायित्व है कि वह घर और बाहर अपनी पत्नी का अपमान न होने दे। उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि प्रेमिका के लिए माता-पिता को छोड़ देना इंसानियत नहीं है। उन्होंने हर घर में रामायण रखने की सलाह दी ताकि परिवार के रिश्ते मजबूत बने रहें।

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