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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट ने दिल्ली सहित देशभर के शिक्षा क्षेत्र के लिए नई उम्मीदों के द्वार खोल दिए हैं। बजट में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) तक के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इस बार के बजट का मुख्य आकर्षण ‘अटल टिंकरिंग लैब’ योजना के फंड में हुई रिकॉर्ड वृद्धि है, जो नवाचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

नवाचार को पंख: अटल टिंकरिंग लैब के बजट में 6 गुना वृद्धि शिक्षा बजट में सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव अटल टिंकरिंग लैब (ATL) के आवंटन में देखा गया है। पिछले संशोधित बजट के 500 करोड़ रुपये के मुकाबले इस वर्ष इसे बढ़ाकर सीधे 3200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में वर्तमान में 450 से अधिक लैब संचालित हैं। बजट में इस भारी वृद्धि से दिल्ली में नई प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

पीएमश्री और पीएम पोषण योजना को मिली मजबूती दिल्ली में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए पीएमश्री स्कूलों के बजट को 4500 करोड़ से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सरकारी स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। साथ ही, बच्चों के पोषण को सुनिश्चित करने वाली ‘पीएम पोषण योजना’ के बजट में भी इजाफा कर इसे 12,750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों और प्रतिभाओं पर ध्यान

  • एनसीईआरटी: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के बजट में 58.63 करोड़ की वृद्धि की गई है।

  • इग्नू: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के लिए 160 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।

  • ध्रुव योजना: प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान के लिए ‘ध्रुव योजना’ को 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे दिल्ली के होनहार बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलेगा।

एजुकेशन टाउनशिप और छात्राओं की सुरक्षा बजट में छात्राओं के लिए हर जिले में हॉस्टल की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे शहरों में शिक्षा ग्रहण कर रही बेटियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किराए का आर्थिक बोझ कम होगा। ‘एजुकेशन टाउनशिप’ का विचार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति लाने के लिए पेश किया गया है।

कुछ क्षेत्रों में बजट का मौन हालाँकि इस बार के शिक्षा बजट में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जेएनयू (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विशिष्ट आवंटन का विवरण साझा नहीं किया गया है। इसी तरह आईआईटी दिल्ली को लेकर भी बजट में स्पष्टता की कमी दिखी है, जिस पर शिक्षा जगत की निगाहें टिकी हैं।

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