उत्तराखंड में गहराया बिजली संकट: मांग और आपूर्ति में भारी अंतर से त्राहि-त्राहि, ग्रामीण इलाकों और उद्योगों में घंटों की कटौती शुरू
उत्तराखंड में गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली की किल्लत ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बीते महज 12 दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है, जिसने ऊर्जा विभाग और यूपीसीएल (UPCL) के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जहां एक मार्च को प्रदेश की कुल मांग 3.8 करोड़ यूनिट थी, वहीं बृहस्पतिवार तक यह आंकड़ा बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट के पार पहुंच गया है। इसके विपरीत, बिजली की कुल उपलब्धता केवल 2.3 करोड़ यूनिट ही रह गई है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच करीब 2.2 करोड़ यूनिट का बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इस संकट की वजह से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों और स्टील फर्नेश उद्योगों में दो से ढाई घंटे तक की कटौती शुरू कर दी गई है।
बिजली संकट के गहराने के पीछे कई तकनीकी और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इजरायल-ईरान युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे काशीपुर स्थित श्रावंती और गामा जैसे गैस आधारित पावर प्लांट पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। इन प्लांटों को चलाने के लिए बाजार में गैस या तो उपलब्ध नहीं है, या फिर इसकी कीमतें इतनी अधिक हैं कि उत्पादन करना बेहद महंगा साबित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, यूपीसीएल को भारतीय ऊर्जा बाजार (IEX) से भी राहत नहीं मिल पा रही है, जहां बिजली की दरें ₹10 प्रति यूनिट से भी अधिक चल रही हैं। नियामक आयोग द्वारा 150 मेगावाट बिजली खरीद के पीपीए (PPA) पर रोक लगाने से स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है।
वर्तमान में राज्य को अपने स्रोतों (UJVNL) से केवल 90 लाख यूनिट और केंद्रीय पूल से 1.3 करोड़ यूनिट बिजली मिल रही है। मांग को पूरा करने के लिए यूपीसीएल बाजार से महंगी बिजली खरीदने को मजबूर है, लेकिन किल्लत इतनी अधिक है कि भारी भुगतान के बावजूद पूरी आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार के अनुसार, आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन गैस की उपलब्धता और बाजार की अनिश्चितता ने फिलहाल संकट को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यदि तापमान में और वृद्धि होती है, तो बिजली कटौती का यह समय बढ़ाया जा सकता है, जिससे आम जनजीवन और उद्योगों पर और भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।
