राज्यसभा निर्वाचित होने के बाद इस्तीफों का दो-चरणीय ‘खेल’; 14 दिनों के भीतर विधान परिषद छोड़ना अनिवार्य, अप्रैल के दूसरे सप्ताह में दिल्ली कूच की तैयारी।
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी ‘विदाई’ की टाइमलाइन को लेकर है। संवैधानिक नियमों और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो नीतीश कुमार की अगली चाल दो महत्वपूर्ण तारीखों— 30 मार्च और 9 अप्रैल के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
इस्तीफे का ‘दो-चरणीय’ गणित: क्या है रणनीति?
राजनीतिक जानकारों और नियमों के मुताबिक, नीतीश कुमार सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगे, बल्कि इसे दो चरणों में अंजाम दिया जा सकता है:
1. पहला चरण (डेडलाइन: 30 मार्च): संवैधानिक नियम के अनुसार, राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है। चूंकि नीतीश 16 मार्च को निर्वाचित हुए हैं, इसलिए उन्हें 30 मार्च से पहले बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
2. दूसरा चरण (टाइमलाइन: 9 अप्रैल): वर्तमान में जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। नीतीश कुमार आधिकारिक तौर पर 10 अप्रैल से उनकी जगह लेंगे। ऐसे में प्रबल संभावना है कि नीतीश 9 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहें और नए उत्तराधिकारी की ताजपोशी सुनिश्चित करने के बाद ही राजभवन को अपना इस्तीफा सौंपें।
