यूपी में आईएसआई के ‘हनीट्रैप और जासूसी’ नेटवर्क का भंडाफोड़: हिंदू नाम और गैंगस्टर ग्रुप्स की आड़ में चल रहा था देशविरोधी खेल
गाजियाबाद/शामली। उत्तर प्रदेश पुलिस और जांच एजेंसियों ने देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। गाजियाबाद पुलिस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) नेपाल, दुबई और अमेरिका में बैठे अपने गुर्गों के जरिए भारत के युवाओं को गुमराह कर रही थी। इस नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आईएसआई हैंडलर्स अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे थे और सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए माथे पर तिलक लगाकर जूम मीटिंग्स (Zoom Meetings) में शामिल होते थे।
साजिश का ‘डिजिटल’ ताना-बाना
जांच में पता चला है कि मुजफ्फरनगर के बुटराड़ा निवासी समीर और उसके साथियों को लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंगस्टरों के नाम पर बने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ा गया था। इन ग्रुप्स का नाम गैंगस्टरों के नाम पर इसलिए रखा गया था ताकि पुलिस को उन पर शक न हो।
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ब्रेनवाश का तरीका: ग्रुप में धार्मिक गतिविधियों और तबलीगी जमात से जुड़े वीडियो साझा कर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला जाता था।
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टारगेट: शामली, मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली और हरियाणा के युवाओं को सेना के ठिकानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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समीक्षा: हर तीसरे दिन विदेशों में बैठे आका जूम मीटिंग के जरिए काम की समीक्षा करते थे।
