आगरा में बड़ा भू-घोटाला: 5 करोड़ की ऐतिहासिक धर्मशाला मात्र 5 हजार के दानपत्र पर बेची, CM योगी तक पहुँचा मामला

आगरा: ताजनगरी के नामनेर चौराहे पर स्थित करीब एक शताब्दी पुरानी ‘चुन्नीलाल अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट’ की बेशकीमती धर्मशाला को अवैध रूप से बेचने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि भूमाफिया और कथित ट्रस्टियों ने सरकारी तंत्र के साथ मिलीभगत कर 5 करोड़ रुपये मूल्य की इस ऐतिहासिक संपत्ति को महज 5 हजार रुपये के ‘दानपत्र’ के आधार पर हस्तांतरित कर दिया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

1927 की डीड का उल्लंघन ट्रस्टी कृष्ण मुरारी अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय चुन्नीलाल अग्रवाल ने वर्ष 1927 में नि:संतान होने के कारण अपनी चल-अचल संपत्ति (संख्या 2/204 एवं 2/205) ट्रस्ट के नाम समर्पित कर दी थी। मूल डीड की शर्तों के अनुसार, नियुक्त ट्रस्टियों को केवल संपत्ति की देख-रेख का अधिकार था; उन्हें इसे बेचने, दान करने या किसी भी रूप में हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं थी।

धोखाधड़ी का सुनियोजित जाल आरोप है कि वर्ष 2010 में मौखिक रूप से नियुक्त किए गए कुछ कथित ट्रस्टियों ने स्वयं को ‘मुख्य ट्रस्टी’ घोषित कर दिया। इसके बाद 30 जून 2025 को नियमों को ताक पर रखकर करीब 300 वर्ग गज में फैली दो मंजिला धर्मशाला को एक ‘संपत्ति समर्पण समिति’ के नाम दान कर दिया गया। भूमाफिया ने इस बहुमूल्य धरोहर पर कब्जे का प्रयास भी किया, जो स्थानीय विरोध के चलते फिलहाल असफल रहा।

सब-रजिस्ट्रार की भूमिका पर उठे सवाल इस पूरे प्रकरण में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सब-रजिस्ट्रार ने ट्रस्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े वैधानिक नियमों की अनदेखी की और भूमाफिया को अनुचित लाभ पहुंचाया। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में दोषियों के साथ-साथ संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भी जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है।

विभागीय जांच शुरू मामले की पुष्टि करते हुए सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) योगेश कुमार ने बताया कि सब-रजिस्ट्रार द्वारा नियमों के उल्लंघन के बिंदु पर गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

error: Content is protected !!