देहरादून में खाकी का खौफ खत्म! मासूम से छेड़खानी का विरोध किया तो सरेराह युवकों को लहूलुहान कर डाला”

देहरादून में ‘जंगलराज’: 7 दिन में 7 बड़ी वारदातें, क्या गुंडों के आगे बेबस हो गई है दून पुलिस?

देहरादून: राजधानी देहरादून, जिसे कभी अपनी शांति और सौम्य वातावरण के लिए जाना जाता था, आज सरेराह गुंडागर्दी का केंद्र बनती जा रही है। बीते एक सप्ताह का रिकॉर्ड देखें तो ऐसा लगता है कि शहर की सड़कों पर कानून का नहीं, बल्कि अपराधियों का राज है।

1. शर्मनाक: मासूम की अस्मत बचाने पर खूनी हमला

शहर के तिलक रोड इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। एक मासूम बच्ची से छेड़खानी का विरोध करने पर एक युवक को सरेआम निशाना बनाया गया। अपराधियों के मन से वर्दी का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि वे अब बेटियों की सुरक्षा करने वालों पर भी जानलेवा हमला करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

2. सड़कों पर ‘तांडव’ और रोड-रेज

  • धर्मपुर क्षेत्र: बृहस्पतिवार को कार सवारों ने गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने एक स्कूटी चालक को बीच सड़क पर रोककर बेरहमी से पीटा।

  • पटेलनगर: बुधवार को यहाँ तीन छात्रों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच जमकर बवाल हुआ। सरेराह हुई इस मारपीट ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी है।

3. घर भी सुरक्षित नहीं: बेखौफ हुए अपराधी

13 जनवरी का दिन देहरादून के लिए बेहद अशांत रहा। पथरीबाग क्षेत्र में बदमाशों ने दुस्साहस दिखाते हुए एक घर में घुसकर दंपति पर हमला कर दिया। उसी दिन कांवली रोड पर भी मारपीट की एक और वारदात सामने आई।

4. जब जनता ने हाथ में लिया कानून

11 जनवरी को नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में अराजकता का चरम देखने को मिला, जहाँ चोरी के एक आरोपी को लोगों ने खंभे से बांधकर पीटा। यह घटना साफ संकेत देती है कि पुलिस की सुस्ती के कारण अब जनता का कानून-व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है।


बड़ा सवाल: कहाँ है खाकी का इकबाल?

नेहरू कॉलोनी से लेकर पटेलनगर तक, हर जगह ‘वर्दी’ पर सवाल उठ रहे हैं। थानों में प्राथमिकी (FIR) तो दर्ज हो रही है, लेकिन क्या पुलिस की गश्त और सक्रियता सिर्फ कागजों तक सीमित है? अगर एक हफ्ते में सात बड़ी वारदातें सरेराह हो सकती हैं, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे समझे?

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ते अपराध अब शहरवासियों के सब्र का इम्तिहान ले रहे हैं।  

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