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यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप लिंक के जाल में फंसा 18 साल का युवक; एक साल के भीतर पिता के कई बैंक खाते कर दिए खाली, साइबर पुलिस जांच में जुटी।

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में साइबर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। हरिद्वार के झबरेड़ा निवासी एक 18 वर्षीय युवक ने ऑनलाइन गेमिंग और ‘मोटा मुनाफा’ कमाने के लालच में अपने पिता के मेहनत और मुआवजे के ₹1.77 करोड़ गंवा दिए। ठगी का शिकार होने के बाद अब पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में गुहार लगाई है।

कैसे शुरू हुआ ‘बर्बादी’ का यह खेल?

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, अभिमन्यु (18) ने जनवरी 2025 में सामान्य गेमिंग ऐप्स (स्पोर्ट्स बाज्जी, प्रोबो और ड्रीम 11) से शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उसे गेमिंग की लत लग गई।

  • द जून 2025 का मोड़: यूट्यूब पर उसने ‘विनअड्डा’ (WinAdda) नामक एक नई गेमिंग वेबसाइट का विज्ञापन देखा।

  • व्हाट्सएप ट्रैप: विज्ञापन देखने के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय नंबरों से लिंक भेजे गए, जिसमें उसे गेम खेलने और निवेश पर भारी रिटर्न का लालच दिया गया।

₹1.77 करोड़ की ठगी का ‘मोडस ऑपरेंडी’

ठगों ने शुरुआत में अभिमन्यु को कुछ छोटा लाभ दिखाकर उसका भरोसा जीत लिया। इसके बाद असली खेल शुरू हुआ:

  1. UPI के जरिए ट्रांसफर: जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच, आरोपियों ने अभिमन्यु से उसके और उसके पिता के विभिन्न बैंक खातों से ₹1,77,53,960 यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर करवा लिए।

  2. निकासी पर रोक: जब इतनी बड़ी रकम जमा हो गई और अभिमन्यु ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने मना कर दिया।

  3. अतिरिक्त दबाव: पैसे लौटाने के बजाय, ठग उस पर और ज्यादा रकम डालने का दबाव बनाने लगे, जिसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ।

पिता की जीवन भर की पूंजी थी यह रकम

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि यह भारी-भरकम राशि युवक के पिता को किसी जमीन या अन्य मद के मुआवजे (Compensation) के रूप में मिली थी। एक साल के भीतर बेटे ने चुपचाप पिता की इस पूंजी को धोखेबाजों के हवाले कर दिया। साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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