रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): जनपद के मुख्य स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल में सोमवार को अव्यवस्थाओं का आलम देखने को मिला। कुत्ते के काटने से बचाव के लिए लगाई जाने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) अचानक खत्म होने से अस्पताल पहुंचे दर्जनों मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह से कतार में लगे लोग दोपहर तक अस्पताल परिसर में भटकते रहे, लेकिन उन्हें उचित उपचार नहीं मिल सका।
स्टॉक खत्म होने से मची अफरा-तफरी जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में डॉग बाइट (कुत्ते के काटने) के मरीज टीकाकरण के लिए पहुंचते हैं। सोमवार सुबह जैसे ही काउंटर से वैक्सीन खत्म होने की सूचना मिली, वहां अफरा-तफरी मच गई। वैक्सीन न मिलने से आक्रोशित तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। स्थिति तब गंभीर हो गई जब कई गरीब मरीज मजबूरन निजी मेडिकल स्टोर की ओर रुख करने लगे।
दो दिनों से भटक रहे तीमारदार अस्पताल की इस लापरवाही का खामियाजा उन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा जो रविवार से इलाज के लिए इंतजार कर रहे थे। एक तीमारदार अनीता ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे रविवार से ही अपने बेटे को वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रही हैं। सोमवार सुबह ८ बजे से लाइन में लगने के बाद भी उन्हें घंटों बाद बताया गया कि स्टॉक समाप्त हो चुका है। संक्रमण फैलने के डर से परिजन बेहद डरे हुए नजर आए।
मेडिकल कॉलेज से कराई गई वैकल्पिक व्यवस्था मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सूचना राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन तक पहुंची, तब जाकर वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास शुरू हुए। आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज से वैक्सीन का स्टॉक मंगाया गया। दोपहर बाद टीकाकरण की प्रक्रिया पुनः आरंभ हो सकी, जिसके बाद घंटों से प्रतीक्षा कर रहे मरीजों ने राहत की सांस ली।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठते सवाल इस घटना ने जिला अस्पताल की आपातकालीन तैयारी और दवाओं के बफर स्टॉक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, तो अस्पताल प्रशासन को जीवन रक्षक टीकों की उपलब्धता अग्रिम रूप से सुनिश्चित करनी चाहिए।
