पटना: बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए मंगलवार को पेश किया गया बजट 2026-27 खुशियों की सौगात लेकर आया है। राज्य सरकार ने कुटीर ज्योति श्रेणी (BPL) के लगभग 58 लाख परिवारों के बिजली बिल के बोझ को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक क्रांतिकारी योजना की घोषणा की है। इन सभी उपभोक्ताओं के घरों की छतों पर 1.1 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा, जिस पर सरकार 100 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करेगी।
पहले चरण में 10 लाख परिवारों को लाभ योजना के क्रियान्वयन को गति देते हुए सरकार ने प्रथम चरण में 10 लाख उपभोक्ताओं के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल से न केवल गरीब परिवारों को सस्ती और निर्बाध बिजली मिलेगी, बल्कि राज्य पर बढ़ते बिजली उत्पादन के दबाव में भी कमी आएगी।
अनुदान का गणित: सौर ऊर्जा से रोशन होंगे घर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के साथ समन्वय करते हुए, बिहार में आवासीय भवनों के लिए अनुदान की दरें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:
-
1 किलोवाट प्लांट: ₹30,000 का अनुदान
-
2 किलोवाट प्लांट: ₹60,000 का अनुदान
-
3 किलोवाट या अधिक: ₹78,000 तक की वित्तीय सहायता
बढ़ती मांग और भविष्य की तैयारी बिहार में विकास की रफ्तार के साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। साल 2025 में जहां अधिकतम मांग 8,752 मेगावाट रही, वहीं साल 2026-27 में इसके 9,600 मेगावाट से अधिक पहुँचने का अनुमान है। इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार भागलपुर के पीरपैंती में ताप विद्युत संयंत्र पर भी तेजी से काम कर रही है, जिसे 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
बजट के अन्य महत्वपूर्ण ‘पावर’ पॉइंट्स:
-
सोलर स्ट्रीट लाइट: सभी पंचायतों में कुल 12 लाख सोलर लाइटें लगाई जाएंगी।
-
कृषि कनेक्शन: सितंबर 2026 तक 8.55 लाख कृषि पंप सेटों को बिजली से जोड़ा जाएगा।
-
स्मार्ट मीटर: राज्य में अब तक 83 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं।
-
उपभोक्ता वृद्धि: राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 2.20 करोड़ के पार पहुँच गई है।
बिहार सरकार का यह कदम राज्य को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
